चंबल संभाग की 13 सीटें बनेंगी गेम चेंजर

भोपाल। मप्र के चंबल संभाग के मतदाता स्वभाव से कभी किसी से नाराज तो किसी पर मेहरबान हो जाते हैं। 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो ज्यादातर सीटों पर पार्टी बदलकर वोट दिया, यानि 2013 में जिन सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को जिताया था तो 2018 में कांग्रेस को भरपूर समर्थन देकर जिताया। श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों से मिलकर बनता है चंबल संभाग। जिले की सात सीटों पर 2020 में उपचुनाव भी हुए। अंचल की दो सीट अंबाह और गोहद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
इस संभाग में 13 विधानसभा सीट आती हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, वर्तमान मंत्री अरविंद भदौरिया, ओपीएस भदौरिया यहीं से आते हैं। कांग्रेस के ही सीनियर लीडर रहे सत्यदेव कटारे जिले की अटेर से चुनाव लड़ते रहे हैं। विधानसभा चुनाव के संदर्भ में अगर डॉ. गोविंद सिंह को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सीटों पर मतदाता कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के प्रत्याशी चुनते आए हैं। 2018 के चुनाव में इस संभाग से कांग्रेस को 10, भाजपा को 2 और बहुजन समाज पार्टी को 1 सीट मिली थी। भिंड सीट पर बसपा के संजीव सिंह 35 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी थे। तीसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी के रमेश सिंह कुशवाहा थे। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रमेश दुबे चौथे नंबर पर थे। संभाग की अन्य सीटों पर भी बसपा के प्रत्याशी थे, लेकिन वे जीत हासिल नहीं कर सके।

पलटी बाजी वोटर्स ने फिर पलट दी
चंबल संभाग की सात विधानसभा सीटों पर 2020 में उपचुनाव हुए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के छह समर्थकों ने भाजपा में शामिल होते हुए इस्तीफे दे दिए थे, जबकि मुरैना जिले की जौरा सीट से विधायक चुने गए कांग्रेस नेता बनवारीलाल शर्मा का 21 दिसंबर 2019 को बीमारी की वजह से निधन हो गया था। जिन छह सीटों से एदल सिंह कंसाना, रघुराज सिंह कंसाना, गिर्राज दंडोतिया, कमलेश जाटव, ओपीएस भदौरिया और रणवीर जाटव ने इस्तीफे दिए थे, उनमें से सिर्फ कमलेश जाटव और ओपीएस भदौरिया ही चुनाव जीत सके। इस तरह छह में से चार सीटों पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा। ओपीएस भदौरिया और अरविंद भदौरिया वर्तमान भाजपा सरकार में मंत्री हैं।

चंबल संभाग की ताजा स्थिति
चंबल संभाग में उपचुनाव के कारण नए समीकरण आए। 2018 के चुनाव में जहां कांग्रेस ने भाजपा से तीन गुना ज्यादा सीटें हासिल की थीं तो उपचुनाव के परिणाम के बाद टैली बदल गई। इस तरह वर्तमान में यहां कांग्रेस के सात, भाजपा के पांच और बसपा का एक विधायक है।

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