25 या 26 कब है संवत की आखिरी पापमोचनी एकादशी, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचिनी एकादशी का व्रत किया जाता है. इस बार यह शुभ तिथि 25 मार्च दिन मंगलवार को है. यह एकादशी चैत्र नवरात्रि से पहले आती है और इस संवत की आखिरी एकादशी भी है. भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का अर्थ है समस्त पापों को नाश करने वाली एकादशी. अर्थात पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मनुष्य को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

पापमोचनी एकादशी का महत्व
पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने के बाद गीता या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से कई जन्मों के पाप से मुक्ति मिल जाती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन चक्र, शंख और गदाधारी भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति भी मिलती है. धार्मिक मान्यता है कि जितना पुण्य हजारों वर्षों की तपस्या से मिलता है, उतना ही फल सच्चे मन से पापमोचनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है. इस दिन सुबह-शाम नारायण कवच का पाठ करना बहुत उत्तम माना गया है.

पापमोचनी एकादशी व्रत कब है?
एकादशी तिथि का प्रारंभ – 25 मार्च, सुबह 5 बजकर 5 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन – 26 मार्च, सुबह 3 बजकर 45 मिनट तक
एकादशी तिथि का पारण – 26 मार्च, सुबह 8 बजकर 50 मिनट से पहले
उदिया तिथि को मानते हुए पापमोचनी एकादशी का व्रत 25 मार्च दिन मंगलवार को किया जाएगा.

पापमोचनी एकादशी पूजा मुहूर्त व शुभ योग
पापमोचनी एकादशी के दिन सुबह से शुभ योग बन रहे हैं, इन शुभ योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं. इस दिन सुबह से शिव योग बनेगा, जो दोपहर 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, इसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा. साथ ही इस दिन द्विपुष्कर योग, लक्ष्मी नारायण योग, मालव्य राजयोग भी बन रहा है.

पापमोचनी एकादशी व्रत पूजन विधि
– पापमोचनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प भी लें.
– इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की मूर्ति या तस्वीर रखकर, हर जगह गंगाजल से छिड़काव करें और पंचामृत से अभिषेक करें.
– अभिषेक के बाद भगवान विष्णु को रोली, अक्षत का तिलक लगाएं और तुलसी, पीले फूल, फल, धूप, दीप और नैवेघ अर्पित करें.
– भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और भोग लगाकर आरती करें.
– भगवान विष्णु के मंत्रों के जप करें और फिर पापमोचनी एकादशी व्रत और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
– दिनभर उपवास रखें और शाम के समय भी भगवान विष्णु की आरती करें और रात के समय जागरण करें.
– अगले दिन ब्राह्मण भोज कराएं और दान-दक्षिणा दें.

पापमोचनी एकादशी के दिन क्या ना करें
– पापमोचनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन ना करें और हर तरह के नशे से दूर रहें.
– एकादशी के दिन किसी को भी नुकसान ना पहुंचाना चाहिए. ना ही झूठ बोलना और ना ही किसी को धोखा देना चाहिए.
– एकादशी के दिन क्रोध ना करें और शांत रहकर ईश्वर का घ्यान करें.

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