वन क्षेत्र से 500 क्विंटल लकड़ी गायब! भीलवाड़ा के बीड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ाें की कटाई पर आरोपों से घिरे सरकारी अफसर

भीलवाड़ा: राजस्थान में भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति के ग्राम पंचायत क्षेत्र बोरड़ा बावरियान में स्थित आरक्षित वन क्षेत्र से तीन दिनों के अंदर लगभग 500 क्विंटल लकड़ी गायब होने का मामला सामने आया है। करीब 674 बीघा में फैले इस वन क्षेत्र में अज्ञात लोगों ने जेसीबी मशीन से अवैध कटाई की और बड़ी मात्रा में लकड़ी ले गए। ग्रामीणाें को जब ‘दाल में कुछ काला’ लगा तो उन्होंने विरोध शुरू किया। हैरानी की बात यह कि इस दौरान वन विभाग के गार्डों को भनक तक नहीं लगी।

ग्रामीणों ने जताया विरोध, जेसीबी सहित आरोपी मौके से भागे

ग्रामीणों को जब पेड़ों की कटाई की जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और कड़ी आपत्ति जताई। विरोध बढ़ता देख कटाई करने वाले लोग अपनी जेसीबी लेकर वहां से भाग निकले। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वे अपने क्षेत्र की लकड़ी को किसी भी कीमत पर बाहर नहीं जाने देंगे।

एफआईआर दर्ज, लेकिन विभाग के बयान उलझे

वन विभाग के पहरेदारों ने मौका रिपोर्ट तैयार कर एक व्यक्ति को नामजद करते हुए वन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। हालांकि जिला स्तर पर अधिकारियों की राय इससे भिन्न बताई जा रही है। विभाग अभी तक यह स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा कि कटाई किसने, किस आदेश पर और किस अनुमति से की।

वन अधिकारी मौके पर पहुंचे, निविदा पर उठे सवालग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए जिला वन अधिकारी भीलवाड़ा के निर्देश पर मांडलगढ़ की उपजिला वन अधिकारी पायल माथुर और शाहपुरा के रेंजर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि केंद्र सरकार की ओर से इस क्षेत्र के लिए ऑनलाइन निविदा जारी की गई थी और संभवतः ठेकेदार उसी के आधार पर काम कर रहे थे। लेकिन जब ग्रामीणों ने निविदा और कार्य आदेश की प्रति मांगी, तो विभाग कोई भी दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहा। अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई वैध ठेका था तो…

  • ग्रामवासियों को सूचना क्यों नहीं दी गई?
  • विभागीय कर्मचारियों को जानकारी क्यों नहीं थी?
  • कटाई रात के समय और गुप्त तरीके से क्यों की जा रही थी?

ग्रामीणाें ने आरोप लगाया कि पिछले दो दिनों से देर रात तक जेसीबी से बबूल के पेड़ों की कटाई चल रही थी, जो स्पष्ट रूप से अवैध गतिविधि लगती है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की जानकारी और मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी कटाई संभव नहीं।

वन क्षेत्र में कटाई के बाद ग्रामीणों ने सरकार से रखी मांग

  • पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो,
  • अवैध कटाई में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए,
  • पेड़ों की कटाई के अनुपात में पौधारोपण किया जाए,
  • और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच कराई जाए।
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