ग्वालियर में 60 फीसद मरीजों को खांसी व बुखार की शिकायत

ग्वालियर ।   जयारोग्य अस्पताल की ओपीडी में खांसी, बुखार व सांस की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। मेडिसिन के डा विजय गर्ग का कहना है कि ओपीडी में तकरीबन 60 फीसद मरीज खांसी व बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जिन्हें कफ वाली खांसी सता रही है जो लंबे समय में ठीक हो रही है। सांस नली में कफ जमने से उन्हें सांस लेने की परेशानी होती है। हालांकि दवाओं से यह बीमारी ठीक भी हो रही है बुखार तीन से पांच दिन में चला जाता है और खांसी थोड़ वक्त ले रही है।कफ वाली खांसी और बुखार के साथ लोग इलाज लेने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

कफ के कारण मरीजों को सांस लेने में परेशानी भी हो रही है। छोटे बच्चों को तो भर्ती तक करना पड़ रहा है। यह परेशानी डाक्टर वायरस के कारण बता रहे हैं। लेकिन इस बात की पुष्टी अबतक नहीं हो सकी कि कौनसा वायरस लोगों को तेजी से बीमार कर रहा है। लेकिन देश भर से आ रही खबरों की मानें तो इसका कारण इन्फलुएन्जा वायरस को बताया जा रहा है। लेकिन इसकी पुष्टी अबतक ग्वालियर में नहीं हुई है। क्योंकि इन्फलुएन्जा वायरस की जाचं की सुविधा निजी लैब और मेडिकल कालेज के माइक्रोबायालोजी लैब पर है। मगर माइक्रोबायोलाजी लैब पर जांच करने वाली किट की उपलब्धता नहीं है और निजी लैब पर जांच शुल्क 4500 रुपये है। इसलिए मरीज निजी लैब पर जांच करने से कतरा रहे हैं।

हालांकि माइक्रोबायोलाजी लैब् के प्रभारी का कहना है किट की उपलब्धता के साथ ही जांच शुरू करा दी जाएगी। उल्टी,दस्त, खांसी, सांस लेने में परेशानीव बुखार की समस्या तेजी से बढ़ी है। शिशुरोग विशेषज्ञ डा सात्विक बंसल का कहना है कि तकरीबन 4 से 5 फीसद बच्चों को भर्ती कर इलाज देना पड़ रहा है। इन्फलुएन्जा वायरस की शिकायत हो सकती है। लेकिन अभी इसकी पुष्टी नहीं हुई। शिशुरोग विभागाध्यक्ष डा अजय गौर का कहना है कि इन्फलुएन्जा वायरस की जांच के लिए कालेज प्रबंधन से मांग की गई है। यदि इसकी जांच शुरू होती है तो मरीज को उपचार देना आसान होगा।

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