कांग्रेस पर भी चढ़ने लगा भगवा रंग

इंदौर ।   राजनीति में अब तक मुद्दे हथियाए जाते थे, लेकिन इन दिनों राजनीतिक पहचान हासिल करने पर जोर है। स्वच्छता की मुहिम के बहाने महात्मा गांधी और स्टेच्यू आफ यूनिटी के बहाने सरदार पटेल से जुड़ी जनभावनाओं को अपनी ओर लेने में बहुत हद तक भाजपा कामयाब रही। अब कांग्रेस भी भाजपा के हिंदुत्व को हथियाने की राह पर चलती दिख रही है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भले ही देशभर में पैदल घूमकर ‘मुहब्बत की दुकान’ खोलने की बात कर रहे हैं, लेकिन कर्नाटक चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेसी खेमे से जो वीडियो जारी हुए उसमें भगवान रामजी और भक्त हनुमानजी नजर आए। खैर, लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ‘बहुसंख्यक’ भावनाओं का ख्याल रखना भी जरूरी है। अब तक कांग्रेसी नेता तिरंगा दुपट्टा ओढ़े नजर आते थे, लेकिन कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद भगवा दुपट्टा ओढ़े नजर आए।

अध्यक्ष के बिना चुनावी संघर्ष की तैयारी

कर्नाटक में मिली जीत ने देशभर में कांग्रेस के चेहरे कमल की तरह खिला दिए हैं। सबसे ज्यादा उत्साहित मध्य प्रदेश के नेता हैं, क्योंकि अगले चुनाव प्रदेश में ही हैं। उम्मीद है कि कर्नाटक से बहकर मप्र में आने वाली हवा अपने साथ वह असर भी लेकर आएगी। चुनाव में अभी समय है, लेकिन उससे पहले प्रदेश नेतृत्व के अगर-मगर में इंदौर का संगठन उलझा है। भाजपा के संगठन से चुनाव लड़ने की बात करने वाले नेता सरकार बनाने का ख्वाब तो देख रहे हैं, लेकिन तीन माह बाद भी शहर कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला नहीं हो सका है। अब तो हालत यह है कि अध्यक्ष की कुर्सी के लिए जोर लगाने वाले भी ठंडे पड़ने लगे हैं। दावेदारी जताने वाले कुछ चेहरे गांधी भवन भी आयोजनों में भी नजर नहीं आए। वैसे भी कांग्रेस में चुनाव संगठन से ज्यादा प्रत्याशी के भरोसे लड़े जाते हैं।

क्रिकेट संग्रहालय के विकास का इंतजार

मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) में इन दिनों विकास की चर्चा है। वैसे ‘विकास’ शब्द सुनकर चुनाव ख्याल सबसे पहले आता है क्योंकि लोकतंत्र के उत्सव के दौरान ही यह शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है। खैर, एमपीसीए में इंदौर के होलकर स्टेडियम से लेकर ग्वालियर के निर्माणाधीन स्टेडियम तक विकास हो रहा है। अंग्रेज भले ही भारत छोड़कर चले गए, लेकिन लार्ड्स की बालकनी की तर्ज पर होलकर स्टेडियम में तैयार किए जा रहे संग्रहालय को देखकर अंग्रेजों की याद आ ही जाती है। मगर महत्वाकांक्षी योजना के तहत बनाए जा रहे इस संग्रहालय का विकास नहीं हो पा रहा। क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि फंड की कमी के साथ ही प्रदर्शित करने वाली वस्तुओं की भी कमी आड़े आ रही है। सालों से बन रहे संग्रहालय का विकास कब होगा इसका इंतजार स्टेडियम में कदम रखने वाले हर प्रशंसक को होता है।

चाय से ज्यादा केतली गर्म

शहर सातवीं बार स्वच्छता में अव्वल आने में जुटा है, लेकिन जिस विभाग के कंधों पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है उसके अधिकारी इन दिनों कुछ दुखी चल रहे हैं। लंबे समय से निगम में प्रशासनिक अधिकारियों का ही शासन रहा, लेकिन जबसे जनता के प्रतिनिधि आए हालात बदल गए। चाय से ज्यादा केतली गर्म होती है और इसी तर्ज पर अब नेताओं के नुमाइंदे भी खुद को नेताजी जताने में कसर नहीं छोड़ते। निगम के गलियारों में चर्चा है कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों को पहले भाई साहब या सर कहकर पुकारा जाता था, अब उनके प्रति संबोधन में वह सम्मान नहीं होता। काम कराने की हठ में कई बार शब्दों की मर्यादा सीमा लांघ जाती है। वरिष्ठों तक यह जानकारी न हो, ऐसा संभव नहीं। मगर चुनाव सिर पर हैं और देवतुल्य कार्यकर्ताओं को नाराज करने का फिलहाल मौसम नहीं है।

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