माता तुलसी की कृपा दिलाएंगा ये चमत्कारी पाठ

हिंदू धर्म को मानने वाले अधिकतर घरों में तुलसी का पौधा लगा होता हैं और लोग रोजाना सुबह शाम इसकी विधिवत पूजा करते हैं सुबह जल अर्पित किया जाता हैं तो वही संध्याकाल में तुलसी के समक्ष घी का दीपक जलाया जाता हैं माना जाता हैं कि तुलसी में धन की देवी लक्ष्मी का वास होता हैं।

ऐसे में इसे घर में लगाने और विधिवत पूजा करने से देवी मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती हैं लेकिन इसी के साथ ही अगर रोजाना सुबह शाम तुलसी पूजा में श्री तुलसी स्तोत्र का पाठ भक्ति भाव से किया जाए तो धन की देवी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं और सभी प्रकार की सुख सुविधाओं का आशीर्वाद प्रदान करती हैं साथ ही तुलसी की कृपा से जीवन के संकट का नाश होता हैं तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं श्री तुलसी स्तोत्र।

 

श्री तुलसी स्तोत्र-

जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे ।
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥

नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे ।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥

तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा ।
कीर्तिता वापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥

नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुं ।
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्याः मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥

तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरं ।
या विनर्हन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥

नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्धाञ्जलिं कलौ ।
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥

तुलस्या नापरं किञ्चिद्दैवतं जगतीतले ।
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥

तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ ।
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥

 

तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥

नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे ।
पाहि मां सर्व पापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥

इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता ।
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी ।
धर्म्या धर्मानना देवी देवदेवमनःप्रिया ॥

लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला ।
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् ।
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥

तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥

इति श्रीपुण्डरीककृतं तुलसी स्तोत्र॥

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