साल के अंत तक शुरू हो सकता है रूसी मदद से मैंगो प्रोजेक्ट में बमों का उत्पादन

जबलपुर ।   आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया कर बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रयास है यहां का मैंगो प्रोजेक्ट। इस प्रोजेक्ट के तहत बमों का उत्पादन शुरू तो हुआ था, लेकिन कतिपय तकनीकि कारणों से प्रोजेक्ट में उत्पादन बंद करना पड़ गया। सब कुछ ठीक रहा तो इस अक्टूबर महीने तक इस प्रोजेक्ट से उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके लिए निर्माणी प्र्रबंधन रशियन विशेषज्ञों की टीम के सतत संपर्क में है।

रूस के साथ प्रोजेक्ट को बढ़ाने की योजना

आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में मैंगो प्रोजेक्ट के तहत बमों का उत्पादन जल्द शुरू होने की संभावना है। रूस के साथ टीओटी (ट्रांसफर आफ टेक्नालाजी) करार के तहत इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की योजना है। इसके लिए एक अलग बिल्डिंग तैयार कराई जा रही है। निर्माणी से जुड़े जिम्मेदारों का कहना है कि रूसी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इस विशेष इमारत का निर्माण कराया जा रहा है। मैंगो प्रोजेक्ट के तहत जाे बम बनाए जाने हैं उनके प्रत्येक चरण का काम अलग-अलग तापमान में होता है। उस तापमान को मेंटेन रखने एक विशेष तकनीक से तैयार बिल्डिंग ही उपयुक्त होती है। लगभग हर दूसरे तीसरे माह रूसी विशेषज्ञों का दल यहां आ रहा है। बिल्डिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है। पिछले दिनों आई रशियन टीम से नई बिल्डिंग को ओके मिल चुका है। यहां से जल्द ही कमीशिनिंग लाट का उत्पादन शुरू होगा। इसके बाद रेग्युलर उत्पादन शुरू हो जाएगा।

फिलहाल बंद पड़ा है उत्पादन

भारत-रशिया के बीच टीओटी करार के बाद रशिया के इंजीनियरों की देखरेख में प्रशिक्षण लेकर आए कर्मचारियों ने 125 मिमी एफएसएपीडीएस (टैंकभेदी बम) बनाना शुरू किया। 2019 में तकनीकि रूप से आई किसी परेशानी की वजह से यहां उत्पादन रोक दिया गया। रशियन विशेषज्ञों ने इस काम के लिए एक पृथक अत्याधुनिक बिल्डिंग की जरूरत बताई। इस बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू भी हो गया। इस बीच रशिया और स्वीडन से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से मैंगो प्रोजेक्ट का काम रूक सा गया। जानकारों का अनुमान है कि नई बिल्डिंग का काम वर्ष के समाप्त हाेने से पहले पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही यहां टैंकभेदी बम 125 मिमी एफएसएपीडीएस बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो जाएगा। एक बम की अनुमानित कीमत सवा चार लाख रुपये के आस-पास है।

जल्द में आएगी रशियन टीम

आगामी सितंबर-अक्टूबर महीने में रशियन विशेषज्ञों की टेक्नीकल टीम ओएफके फिर से आएगी। इस दौरान टीम द्वारा बमों के निर्माण का कमीशनिंग लाट तैयार किया जाएगा। इस लाट के कम्पलीट होते ही निर्माणी में रेग्युलर उत्पादन शुरू हो जाएगा।

बढ़ जाएगा सैकड़ों करोड़ का उत्पादन

मैंगो प्रोजेक्ट के शुरू होने से ओएफके को बड़ी उम्मीदें हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस काम के प्रारंभ होने से निर्माणी को औसतन सात से आठ सौ करोड़ रुपये का काम अतिरिक्त मिलने लगेगा। इसके साथ ही निर्माणी के कामगारों को ओवरटाइम की सुविधा भी सहज मिलने लगेगी।

टैंक के परखच्चे उड़ा सकता है

सेना के जवान टी-72 एम-1 टैंक से निशाना साधकर 125 मिमी एफएसएपीडीएस बम को चलाते हैं। यह बम दो हिस्सों में बना होने की वजह से इसका पहला हिस्सा तेज गति से दुश्मनों के टैंक से टकराकर उसकी मोटी चादर काे भेदता है और टैंक कं अंदर पहुंचते ही बम का दूसरा हिस्सा जबर्दस्त विस्फोट कर टैंक के परखच्चे उड़ा देता है।

सवा चार लाख का एक बम

रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर आयुध निर्माणी बोर्ड ने ओएफके को यह अत्याधुनिक गोला-बारूद बनाने (उत्पादन) की जवाबदारी सौंपी है। ओएफके में बने 125 मिमी एफएसएपीडीएस के एक नग की लागत चार लाख बीस हजार रुपये है। आयुध निर्माणी खमरिया सेना की विशेष मांग पर करीब सवा दो सौ करोड़ की लागत से अत्याधुनिक टैंकभेदी बम के 5 हजार नग जल्द से जल्द बनाने भी तैयार है।

इनका कहना है…

मैंगों प्रोजेक्ट से उत्पादन निर्माणी के लिए महत्वाकांक्षी प्रयास है। नई बिल्डिंग को रशियन टीम से ओके मिल चुका है। उम्मीद है अक्टूबर महीने में कमीशनिंग लाट का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से निर्माणी को प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ का अतिरिक्त काम उपलब्ध होगा।

-आरके कुम्हार, पीआरओ-ओएफके

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