एमआइसी, महापौर, निगमायुक्त के भी बढ़े वित्तीय अधिकार, 20 करोड़ तक के कार्य मंजूर कर सकेगी

जबलपुर ।   मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) अब 20 करोड़ रुपये तक के कार्य मंजूर कर सकेगी। इसी के साथ महापौर और निगमायुक्त के वित्तीय अधिकार भी बढ़ा दिए गए हैं। महापौर अब 10 करोड़ तक के और निगमायुक्त पांच करोड़ रुपये तक के विकास व निर्माण कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। इसी तरह नगर निगम परिषद अब 20 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को स्वीकृति दे सकेगी।

पहले इतने दिए गए थे अधिकार

दरअसल नगरीय निकायों को और ज्यादा मजबूत करने के लिए वित्तीय अधिकारों में संशोधन करते हुए 22 अगस्त 2023 को राजपत्र में इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। पूर्व में नगर परिषद को 20 करोड़ तक के एमआइसी को 10 करोड़, महापौर को पांच करोड़ और निगमायुक्त को दो करोड़ रुपये तक के वित्तीय अधिकार दिए गए थे। वित्तीय अधिकार बढ़ने से अब शहर विकास के कार्य सुचारू रूप से हो पाएंगे वहीं जबलपुर भी महानगर बनने में तेजी से अग्रसर होगा।

राजपत्र में अधिसूचना जारी

मध्यप्रदेश राजपत्र में जारी अधिसूचना में कहा गया है कि एमआइसी अब 20 करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृती दे सकेगी। जबकि महापौर 10 करोड़ और निगमायुक्त दो करोड़ रुपये के तक कार्य स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं नगर निगम परिषद 20 करोड़ से अधिक के कार्यों को मंजूरी दे सकती है। यानी सदन में 20 करोड़ रुपये के के कार्य मंजूर किए जा सकेंगे।

आठ वर्ष बाद हुआ संशोधन

बताया जाता है कि महापौर, निगमायुक्त, एमआइसी सहित निगम परिषद के वित्तीय अधिकारों में करीब आठ वर्ष बाद संशोधन किया गया है। इसके पूर्व वर्ष महापौर को पांच करोड़ , एमआइसी को 10 करोड़ और निगमायुक्त को दो करोड़ रुपये के वित्तीय अधिकार दिए गए थे। नए संशोधन के बाद छोटे-छोटे कार्यों को प्रस्तावों के लिए अधिकारियों को सदन की स्वीकृति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इतना जरूर है कि नगर निगम परिषद की बैठकों में प्रस्तावों की भरमार नहीं होगी।

ये होगा फायदा

– एमआइसी में शामिल सामान्य प्रशासन, जलकार्य एवं सीवरेज, लोक निर्माण तथा उद्यान, राजस्व, वित्त एवं लेखा, विद्युत एवं यांत्रिकी, स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, यातायात व परिवहन, योजना एवं आईटी, शहरी गरीबी उपशमन जैसे विभागीय कार्यों में गति आएगी।

– वित्तीय अधिकार बढ़ने से छोटे ब्रिज, सड़कें, स्ट्रीट लाइट, सीवेज सिस्टम आदि के काम में तेजी से आ सकेगी। निगम अफसरों को बार-बार मंजूरी के लिए परिषद नहीं जाना पड़ेगा।

– नगर निगम सदन की बैठक में 20 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों को स्वीकृति देने के अधिकार होंगे इससे शहर के विकास को पंख लगेंगे।

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