सांस्कृतिक विभाग से नहीं मिला बजट तो इस बार नहीं आया मेला में बड़ा कलाकार

 ग्वालियर ।   ग्वालियर व्यापार मेला में इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर केवल खाना पूर्ति की गई। इस बार कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ तो मेला में होने वाले सांसकृतिक कार्यक्रमों में कोई भी बड़ा कलाकार हिस्सा लेने भी नहीं आया। उसका कारण सांस्कृतिक विभाग ने न तो मेला में बड़े आयोजन की मंजूरी दी और न हीं फंड उपलब्ध कराया। प्राधिकरण ने जब उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा काे जब प्रस्ताव भेजा तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। मेला प्राधिकरण ने स्थानीय स्तर पर जाे निशुल्क सांस्कृतिक कार्यक्रम कराया उसका सोमवार को समापन हो गया और बड़ा कोई भी आयोजन नहीं हो सका। अगले साल होगा या नहीं इस पर भी कुछ कहा नहीं जा सकता। हालांकि उद्योगमंत्री का कहना है कि इस विषय पर चर्चा की जाएगी। इधर ग्वालियर में होने वाली स्टार्टअप मीट में शामिल होने के लिए विदेशी मैहमान पहुंचेगे। जो 25 जनवरी को मेला बिजिट भी करेंगे। इधर मेला में ठीक साफ सफाई न होने से गंदगी पसरी हुई है। यदि मेला में स्वच्छता दिखानी है तो नगर निगम को ही मेला में सफाई करना होगी।

मेला में होते थे बड़े आयोजन

मेला की भव्यता को बढ़ाने का काम सांस्कृतिक आयोजन करते थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़े गायक,कलाकार सिरकत करते थे। जिन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में सैलानी मेेला पहुंचते थे। यह कार्यक्रम दिन व रात में होते थे इसलिए मेला में सुबह से लेकर देर रात तक सैलानियों की भीड़ उमड़ती रहती थी। इससे मेला का व्यापार बढ़ता था और व्यापारियों को मोटा मुनाफा मेला में कमाने का मौका मिलता था। लेकिन इस बार कोई भी बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेाजन नहीं हुआ। प्राधिकरण ने बजट न होने के कारण निशुल्क प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों से गायन आदि के कार्यक्रम करा दिए। जिसमें न तो सैलानी पहुंचे और न मेला व्यापारियों को उसका लाभ मिल सका। जबकि हर साल होने वाले बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर प्राधिकरण पूरे शहर व अंचल में प्रचार प्रसार कराता था जिससे मेला में भीड़ बढ़ती थी।

कुछ दुकानें खाली पर मेला तैयार

ग्वालियर व्यापार मेला में इस बार कुछ पक्की व कच्ची दुकानें खाली रह गई। हालांकि मेला पूरी तरह से लगभग तैयार हो चुका है। अब जो दुकानें खाली बची है वह शायद भर सकें। हालांकि प्राधिकरण ने इस बार जिन स्थानों पर अधिक भीड़ रहती है उन स्थानों को ठेला मुक्त किया गया है इसके साथ ही मेला परिसर में ठेला लगाने पर 1500 रुपये का शुल्क भी लिया जा रहा है।

मेला में न सफाई न सड़क

मेला में इस बार न तो टूटी सड़कों को बनवाया गया और नहीं टूटीदुकानों की मरम्मत का कार्य हुआ। हालात यह हैं कि प्राधिकरण द्वारा दिए गए ठेका के बाद भी परिसर में सफाई ठीक से नहीं हो पा रही है। मेला में छतरी पर प्राधिकरण की ओर से डस्टबीन भी नहीं रखबाई गई जिससे सैलानी कोई कचरा फैंके तो वह सड़क पर न डालकर डस्टबीन में डाल सकें। इधर मेला की सड़कों पर धूल उड़ रही है तो शौचालय गंदे पड़े हुए हैं। इससे मेला में सैलानियों से लेकर व्यापारियों तक के लिए मुसीबत बनी हुई है। इन समस्याओं परप्राधिकरण ध्यान नहीं दे रहा है।

इनका कहना है

सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए सांस्कृतिक विभाग से अनुमति नहीं मिल सकी होगी। मेरे पास कोई भी प्रस्ताव पेंडिंग नहीं है। अगले साल के लिए बजट के लिए चर्चा करेंगे, बाकी की जानकारी लेने के बाद ही आपको बता सकूंगा।

ओमप्रकाश सकलेचा, उद्योग मंत्री

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