शीतला सातम व्रत जब लगता है माता को बासी भोग जानें इस व्रत से जुड़ी विशेष बातें

शीतला सातम का व्रत भादो माह की सप्तमी के दिन किया जाता है. शीतला अष्टमी से एक दिन पहले इस पर्व सातम को मनाया जाता है. शीतला सातम पंचांग अनुसार सप्तमी तिथि के दिन पड़ती है यह पर्व भक्ति के साथ मनाया जाता है.

शीतला सप्तमी को बासौड़ा भी कहा जाता है. शीतला माता का व्रत इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन देवी मां को बासी और ठंडे पकवानों का भोग लगाने की परंपरा है.

शीतला सातम संतान के सुख का समय
शीतला माता को संतान की सुरक्षा एवं उसके दीर्घ जीवन देने वाला माता के रुप में पूजा जाता है. शीतला माता की पूजा मातें अपनी संतान हेतु करती हैं. इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत विशेष माना जाता है. शीतला सातम के दिन शीतला माता की पूजा में दही, दूध, गन्ने का रस, चावल और अन्य चीजों से बना नैवेद्य चढ़ाया जाता है.

देवी मां को भोग लगाने के लिए पकवान बनाए जाते हैं लेकिन पकवान बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि यह कोई आम व्यंजन नहीं बल्कि माता शीतला को प्रसाद के रूप में दिया जाने वाला विशेष प्रसाद होता है. आइए जानते हैं शीतला सातम पर माता शीतला को भोग लगाने के लिए क्या और कैसे व्यंजन बनाए जाते हैं ओर इन से जुड़ी विशेष बातें क्या हैं.

शीतला माता पूजन और बासी भोग नियम

भोग बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसे इतना न पकाएं कि यह जल जाए और लाल हो जाए. भोजन को धीमी आंच पर ही पकाना अच्छा होता है. भोग के लिए व्यंजन बनाते समय घी का ही प्रयोग करना अधिक शुभ होता है. सप्तमी से पूर्व ही सारे पकवान तैयार कर लेने जरुरी होते हैं कोई भी काम अगले दिन के लिए न छोड़ा जाता है.
पकवान बनाने के बाद रसोई को अच्छी तरह साफ करना और उसके बाद रोली, अक्षत, फूल आदि चढ़ाना जरुरी होता है.

चूल्हे का पूजन विशेष रुप से किया जाता है. इस पूजा के बाद सातम के दिन चूल्हा नही जलाया जाता है.
शीतला सातम के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं. इसके बाद शीतला माता को भोग लगाने के लिए जो भी पकवान बनाए जाते हैं उन्हें पूजा स्थान पर रख कर इसके बाद शीतला माता की विधि-विधान से पूजन किया जाता है. शीतला सातम करने से पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है.
 

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