भाजपा नेत्री के खाते में गई थी गबन की राशि, कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर पर भी मामला दर्ज

शिवपुरी ।   पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर पदस्थ कार्यवाहक प्रधान आरक्षक द्वारा किए गए गबन की पुष्टि हो गई है। गबन की पुष्टि होते ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और अमानत में खयानत का मामला दर्ज कर लिया है। आरक्षक द्वारा गबन की गई राशि अपनी पत्नी, भाजपा की सह सोशल मीडिया प्रभारी अनीता सेन के खाते में ट्रांसफर की थी। उल्लेखनीय है कि वित्त विभाग द्वारा गठित की गई एफएसआइसी सेल ने शिवपुरी एसपी आफिस से लगातार भुगतान हो रहे बिलों पर जब नजर बनाई तो उन्हें कुछ भुगतान संदेहास्पद प्रतीत हुए। जब मामले की पड़ताल शुरू की गई तो संदिग्ध भुगतानों का काफी बड़ा लेखा-जोखा सामने आया। इसी क्रम में वित्त विभाग और एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया ने मामले की पड़ताल के लिए जांच दल गठित किए। प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं उसके अनुसार कार्यवाहक प्रधान आरक्षक मुकेश सविता ने 4 लाख 43 हजार 275 रुपये की राशि का गबन कर अपनी पत्नी, भाजपा की सह सोशल मीडिया प्रभारी अनीता सेन के खाता क्रमांक-63025212668 में डाली गई। जब मुकेश सविता को लगा की वह पकड़ में आ गया है तो उसने 8 सितंबर 2023 को चालान के माध्यम से 0055 पुलिस हैड में 3 लाख 6 हजार 453 रुपये जमा भी करवाए, ताकि वह बच सके, हालांकि जानकार बताते हैं कि मुकेश सविता द्वारा पुलिस हैड में वापिस जमा कराई गई राशि से यह स्वत: प्रमाणित हो गया है कि उसने अपराध किया है।

कई अन्य लोगों के खाते में भी हुआ संदिग्ध भुगतानपुलिस व वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुकेश सविता द्वारा अपनी पत्नी के खाते में जो भुगतान किए हैं वह तो पकड़ में आ गए हैं, लेकिन इसके अलावा भी उसके द्वारा कई अन्य लोगों के खाते में भी इसी तरह से राशि का गबन कर भुगतान किए गए हैं। अगर मामले की गहनता से पड़ताल की जाएगी तो इसमें कई पुलिसकर्मियों के खातों में भी गबन की गई राशि जमा कराया जाना प्रमाणित हो जाएगा। वित्त विभाग ने मांगा रिकार्ड, फिलहाल नहीं दियावित्त विभाग के सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिकतौर पर जो दस्तावेज चैक किए गए हैं उनमें ही काफी अनियमितताएं सामने आई हैं। ऐसे में विभागीय रिकार्ड काफी बड़ा है। गबन की राशि कितनी है इसका खुलासा तो पूरे रिकार्ड की जांच करने के बाद ही हो सकेगा। वित्त विभाग ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय से नियमानुसार पूरा रिकार्ड पड़ताल के लिए मांगा है। फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूरा रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। सूत्रों का कहना है कि कई खातों में संदिग्ध भुगतान किए गए हैं, अब वह लोग कौन-कौन हैं यह भी पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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