जिला बनाने की राजनीति कहीं भारी न पड़ जाए, 56 सालों से भाजपा का गढ़ रहा बागली, फिर भी अधूरी है मांग

देवास ।   मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल बनने से पहले ही जिला बनाने की राजनीति तेज हो गई थी। बड़े जिलों के कुछ हिस्सों को जिला बनाने की घोषणाएं धड़ाधड़ होती चली गईं। इस प्रक्रिया में उन क्षेत्रों में जमकर असंतोष फैला जो वर्षों से अपने क्षेत्र को जिला बनने का इंतजार कर रहे हैं। देवास जिले का बागली ऐसा ही विधानसभा क्षेत्र है। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी इसी बागली सीट से सबसे ज्यादा बार चुने जाने के साथ ही मुख्यमंत्री भी रहे थे। 1977-78 में उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही क्षेत्र को जिला बनाने की मांग उठी थी, लेकिन 45 साल बाद भी मांग अधूरी ही रही।

श‍िवराज 12 बार बागली को जिला बनाने की घोषणा कर चुके

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 12 बार बागली को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन ये कागजों पर नहीं उतर सका। इसी तरह कुक्षी, आलोट जैसे क्षेत्र के रहवासी भी इस बात से नाराज है कि उनके क्षेत्रों के जिला बनाने की मांग पूरी नहीं की जा रही है। यहां जिलों की राजनीति कहीं ‘राजनीति’ पर भारी न पड़ जाए।

राजनेताओं के वादों की बाट जोह रहे

नागदा सहित अन्य विधानसभा क्षेत्रों को जिले का दर्जा देने की घोषणा के बाद एक बार फिर ऐसे क्षेत्रों से जिला बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है जो लंबे समय से राजनेताओं के वादों की बाट जोह रहे हैं।

एक माह से चल रहा आंदोलन

देवास जिले के बागली में करीब एक माह से जिला बनाओ अभियान समिति आंदोलन कर रही है। बागली वह विधानसभा सीट है, जो 56 साल से भाजपा का गढ़ है। बागली को जिला बनाने की मांग लंबे समय से जारी है।

2020 में हाटपीपल्या विधानसभा उपचुनाव से पहले पूर्व सीएम जोशी की प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंच से सीएम ने कहा था कि प्राण जाए पर वचन ना जाए…। बागली को जिला जरूर बनाऊंगा। 2021 में सीएम हाउस में भी जिला बनाने की बात दोहराई थी। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल को कई बार आश्वासन भी दिया था कि लेकिन मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

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