मध्यप्रदेश में बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई तक का खर्च राज्य सरकार ने उठाया

मध्यप्रदेश की धरती पर जन्म लेने वाली हर बेटी की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। एक समय था जब बेटी के पैदा होते ही माता पिता को उसकी शादी और पढ़ाई की चिंता सताने लगती थी, बेटियां न सिर्फ पढ़ने से वंचित रह जाती थीं, बल्कि उनकी शादी भी अच्छे घर में नहीं हो पाती थी। लेकिन राज्य सरकार की दूरगामी नीति और जनहितकारी योजनाओं की वजह से प्रदेश में जन्म लेने वाली हर बेटी की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार की है। लाड़ली लक्ष्मी और लाडली बहना योजना मध्यप्रदेश में महिलाओं का संबल बन रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत अब तक 15 लाख से अधिक बेटियों को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।
बेटी के जन्म के समय अब मध्यप्रदेश में जश्न बनाया जाता है, क्योंकि बेटियां अब बोझ नहीं रही। सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी और लाडली बहना योजना बेटियों के लिए आर्थिक संबल बन रही है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश में जन्म लेने वाली हर बेटी की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है, बेटियों के 21 साल के होने पर सरकार एकमुश्त राशि सरकार बेटी के खाते में जमा करा देती है। यही नहीं यदि बेटी शादी नहीं करना चाहती है तो उसकी शिक्षा के लिए इस धनराशि का प्रयोग किया जा सकता है। इस स्कीम के तहत सरकार हर साल छह हजार रुपए हर साल बेटियों के खाते में जमा करती है, एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 13 लाख से भी ज्यादा बेटियों को छात्रवृत्ति के रूप में 384 करोड़ 13 लाख रुपए बांटे जा चुके हैं। इसी तरह लाडली बहना योजना उस बहनों के लिए आर्थिक संबल बनी जो आर्थिक परिस्थिति के कारण पीछे रह जाती है। इस योजना के तहत हर महीने महिलाओं को 1250 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। कुछ समय पहले ही योजना की छठवीं किश्त महिलाओं के खाते में जमा की गई है। राज्य सरकार योजना पर अब तक 1596 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित महिला हितकारी योजनाओं के जरिए महिलाओं का मनोबल बढ़ रहा है, महिला उद्यमिता के लिए भी सरकार ने कई अनुकूल परिस्थितियां बना दी है, महिला उद्यमियों को कर में छूट, ऋण के ब्याज दर में कमी के साथ ही उद्योग लगाने पर जमीन की रजिस्ट्री के शुल्क में कमी आदि कुछ ऐसी पहल है, जिसने महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए खुला आसमान दिया है।

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