करंट की चपेट में आने से हाथी की हुई मौत, खेत के बाहर मिला का शव…..

बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के नरसिंहपुर में बिजली करंट से हाथी की मौत हो गई। बुधवार सुबह गन्ना खेत के बाहर हाथी का शव मिला।प्रारंभिक जांच के बाद आशंका हैं कि गन्ना फसल की सुरक्षा के लिए जीआई तार का घेरा खेत के चारों ओर लगाया गया था। तार के घेरे में सुनियोजित तरीके से करंट प्रवाहित कर दिए जाने के कारण ही हाथी उसके संपर्क में आ गया जिससे उसकी मौत हो गई।

हाथी का शव गन्ना खेत के बाहर ही पड़ा हुआ था इसलिए खेत के बाहरी क्षेत्र में ही करंट प्रवाहित तार बिछाने का अनुमान है हालांकि वन विभाग की ओर से अभी तक अधिकृत रूप से यह पुष्टि नहीं की गई है कि सुनियोजित तरीके से करंट लगाकर हाथी को मारा गया है। वन व पुलिस विभाग के अलावा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी कर्मचारी भी घटना स्थल पर पहुंच कर जांच पड़ताल में जुटे हुए हैं।

वन विभाग की टीम साक्ष्य एकत्रित करने का प्रयास कर रही है। पशु चिकित्सकों की टीम को भी मौके पर ही बुलाया गया है।महीनों बाद बलरामपुर जिले में किसी जंगली हाथी की मौत हुई है। इस घटना से वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी सकते में है। बलरामपुर जिले में ही पिछले दिनों हाथियों के कारण जनहानि की तीन घटनाएं हुई थी। इधर हाथी की मौत के बाद वन विभाग के अधिकारी,कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगना भी शुरू हो गया है।

मालूम हो कि 28 हाथियों का दल पिछले लगभग 10 दिनों से इसी क्षेत्र में विचरण कर रहा है। हाथियों का यह बड़ा दल सूरजपुर जिले के प्रतापपुर तथा बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के सीमावर्ती गांव में फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाने के अलावा मकान को भी क्षति पहुंचा रहा है। इन दिनों गन्ने की फसल तैयार है। शक्कर कारखाना में गन्ना फसल की खरीदी भी हो रही है।

इसी बीच हाथियों के आ जाने के कारण किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। गन्ना जंगली हाथियों का पसंदीदा आहार है।इस सीजन में जिस क्षेत्र में गन्ने की खेती ज्यादा होती है उधर जंगली हाथियों का विचरण भी शुरू हो जाता है। बहरहाल करंट से हाथी की मौत के बाद वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी नरसिंहपुर पहुंच गए हैं। ग्रामीणों का बयान दर्ज करने के अलावा घटनास्थल का निरीक्षण भी किया जा रहा है।

कुछ वर्ष पहले भी राजपुर व प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र में एक के बाद एक तीन हाथियों की मौत हुई थी। उस दौरान जंगली हाथियों को सुनियोजित तरीके से खाद्य पदार्थ में कीटनाशक मिलाकर देने का संदेह जताया गया था। वन् विभाग ने हाथी के मौतों का कारण स्पष्ट नहीं किया था। विभागीय तौर पर घटनाओं को लापरवाही मानते हुए तत्कालीन डीएफओ को हटा दिया गया था। एसडीओ,रेंजर व मैदानी कर्मचारी विभागीय जांच के दायरे में आ गए थे।

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