4 महीने नदी में डूबा रहता है यह मंदिर, नहीं होता नुकसान, यहां डेढ़ हजार साल पुराना शिवलिंग!

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो आश्चर्य से भरे पड़े हैं. कई मंदिरों के रहस्य तो आज तक विज्ञान भी नहीं जान सका. ऐसा ही एक मंदिर जबलपुर में भी है, जो चार महीने पानी में डूबा रहता है. आश्चर्य तो ये है कि इसके बावजूद मंदिर को कोई नुकसान नहीं होता. बताया जाता है कि यह मंदिर करबी डेढ़ हजार साल पुराना है.

आपने भोलेनाथ के द्वादश ज्योतिर्लिंगों के बारे में तो सुना ही होगा, जहां पर भोलेनाथ प्रत्यक्ष तौर पर प्रकट हुए थे. आज हम आपको जबलपुर संस्कारधानी के ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो लगभग 1.5 हजार साल पुराना बताया जाता है. इसके बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है. जबलपुर के खारी घाट में मां नर्मदा के किनारे स्थित पंचाक्षर भोलेनाथ का मंदिर अद्भुत है.

कहीं से देखो दिखेंगे भोलेनाथ!
पुजारी मनीष दुबे ने बताया की इस मंदिर की देखभाल करते हुए वह अपने परिवार की आठवीं पीढ़ी हैं और सैकड़ों वर्षों से उनका परिवार यहां की देखभाल कर रहा है. आगे बताया कि मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किए गए पत्थर आज के जमाने में कहीं और देखने को नहीं मिलते. खास बात यह है कि इस मंदिर को चारों दिशाओं से देखने पर आपको हर दिशा से भोलेनाथ के दर्शन होते हैं. मंदिर में भोलेनाथ का प्राचीन शिवलिंग है. साथ-साथ उनका पूरा परिवार विराजित है, जिसमें कार्तिकेय जी, गणेश भगवान, मां भगवती और भोलेनाथ के वाहन नंदी स्थापित हैं. यह सभी प्रतिमाएं लगभग 1.5 हजार वर्ष पुरानी हैं.

साल में 4 महीने पानी में डूबा रहता है मंदिर
मनीष दुबे ने बताया कि साल के 4 महीने मां नर्मदा के किनारे स्थित यह मंदिर पानी के अंदर ही डूबा रहता है. बारिश के दिनों में मां नर्मदा स्वयं भोलेनाथ का यहां अभिषेक करती हैं. साथ ही मां नर्मदा के किनारे स्थित भोलेनाथ के शिवलिंग का विशेष महत्व है. जो भक्ति पूरी श्रद्धा के साथ मां नर्मदा में स्नान करने के पश्चात नर्मदा जल से भोलेनाथ का अभिषेक करता है, उसकी समस्याएं दूर होती हैं.

जबलपुर का प्राचीन घाट
जबलपुर संस्कारधानी के इस घाट पर खारी विसर्जित की जाती है, इसलिए इसे खारी घाट बोला जाता है. यह जबलपुर के सबसे प्राचीन घाटों में से एक है. यहीं पर स्थित है भोलेनाथ का यह प्राचीन मंदिर.
 

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