माननीयों की पसंद से होंगे क्षेत्रों में करोड़ों के विकास के काम

भोपाल । नए वित्त वर्ष के चार माह बाद होने वाले लोकसभा चुनाव की वजह से प्रदेश सरकार इस बार वार्षिक बजट के पहले नए वित्त वर्ष के शुरुआती माह में खर्च के लिए लेखानुदान लाने जा रही है। इसकी वजह है लोकसभा चुनाव के चलते केन्द्र सरकार का वार्षिक बजट भी लोकसभा चुनाव के बाद ही आएगा। अहम बात यह है कि लेखानुदान यानी बोट ऑन अकाउंट में सांसदों व विधायकों के इलाकों में जरूरी विकास कामों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए दोनों ही तरह के जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव भेजने को कहा जा रहा है। राज्य शासन ने सांसदों से एक सप्ताह में 50 करोड़ और विधायकों से 15 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे हैं। इसके साथ ही कहा गया है कि वे प्रस्ताव के साथ ही कार्यों का एस्टीमेट भी दें, जिससे की उनको जल्द से जल्द स्वीकृति दी जा सके। दरअसल इसकी वजह है अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव।
सरकार लेखानुदान में इन प्रस्तावों को शामिल करेगी, ताकि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पूर्व विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जा सके। देश में चार महीने बाद लोकसभा के चुनाव होगे। लोस चुनाव की आचार संहिता मार्च में प्रभावशील होने के आसार है। इस तरह सरकार के पास काम करने के लिए सिर्फ दो महीने है। इस अवधि में उसके सामने संकल्प पत्र में शामिल घोषणाओं को पूरा करने की चुनौती है,ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान न उठाना पड़े। संकल्प पत्र में 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदी, 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी जैसी घोषणाओं पर सरकार को तत्काल आदेश जारी करना होगा। प्रदेश में धान की खरीदी जारी है और गेहूं की खरीदी मार्च के अंत से शुरू हो जाएगी। कांग्रेस लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा सरकार के संकल्प पत्र को लेकर घेरने की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि सरकार को जनवरी और फरवरी में मिशन मोड में काम करना होगा।

फरवरी में लाया जा सकता है लेखानुदान
केंद्र सरकार एक फरवरी को संसद में बजट लेखानुदान यानी वोट ऑन अकाउंट लाएगी। लोकसभा चुनाव होने के बाद नई सरकार बनने पर पूर्ण बजट पेश होगा। मार्च की शुरुआत में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के आसार है, इसलिए मप्र सरकार भी फरवरी में विधानसभा का सीमित अवधि का बजट सत्र आहूत कर लेखानुदान ला सकती है। इसी सत्र में दूसरा अनुपूरक बजट लाने की तैयारी वित विभाग कर रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में आमतौर पर मार्च के शुरुआती दिनों में बजट पेश किया जाता है, लेकिन इस बार लेखानुदान फरवरी में विधानसभा में लाए जाने के आसार है। इसकी मुख्य वजह यह है कि विधानसभा में लेखानुदान को मंजूरी मिलने के बाद लोस चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पूर्व विभागों को राशि का आवंटन किया।

यह होता है लेखानुदान
लेखानुदान में खर्च के अनुमान के आधार पर चार-पांच महीने के लिए विभागवार राशि का आवंटन किया जाएगा। एक पतली सी पुस्तिका में संबंधित विभाग के सामने उसे आवंटित राशि का उल्लेख होता है। इसमें विभाग के लिए मांग-वार राशि का निर्धारण नहीं किया जाता। इसलिए लेखानुदान पर विधानसभा में चर्चा नहीं होती। फिर केंद्र सरकार जब पूर्ण बजट पेश करेगी, तो उसके बाद मप्र सरकार भी बजट पेश करेगी। जिसमे विभागों के लिए मांग वार राशि का निर्धारण किया जाएगा और उस पर विधानसभा में चर्चा होगी।

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