300 किलो के बजाए 80 किलो लकड़ी में हो जाएगी अंत्येष्टी, रामबाग मुक्तीधाम में नए शवदाह गृह का लोकार्पण

 इंदौर ।   रामबाग मुक्तीधाम में शवदाह के लिए स्वर्गारोहण ईकाई लगाई गई है। प्रदेश की पहले शवदाह गृह का लोकार्पण मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने किया। इसमें खर्च भी कम होगा और प्रदूषण भी कम होगा। पहले एक अंत्येष्टी में 300 किलो लकड़ी लगती थी, लेकिन इस शवदाह गृह में 80 से 100 किलो लकड़ी में अंत्येष्टी हो रही है। धुआंं भी कम हो रहा है और चिमनी के जरिए वह सीधे आसमान में जा रहा है। इससे आसपास का वातावरण भी प्रदूषित नहीं हो रहा है। मेयर भार्गव ने शहर के तीन नए शमशान घाटों में स्वर्गारोहण ईकाई लगाने की घोषणा की है। मराठी सोशल ग्रुप ट्रस्ट ने हर साल लगने वाले जत्रा मेले से हुई आय से यह ईकाई रामबाग मुक्तीधाम में लगाई है। ट्रस्ट के अध्यक्ष सुधीर दांडेकर, राजेश शाह ने बताया कि प्रदेश का पहला ईकोफ्रेंडली शवदाह गृह रामबाग मुक्तीधाम में शुरू हुआ है। गुजरात के कई शहरों में इस तरह के शवदाह गृहों का उपयोग हो रहा है। लकड़ी कम लगने से पर्यावरण के लिए भी यह शवदाह गृह काफी उपयोगी है।

छह मोक्ष रख अप्रैल से नगर निगम शुरू करेगा

इस मौके पर मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि शहर के छह विधानसभा क्षेत्रों में नगर निगम मोक्ष रथ का संचालन करेगा,ताकि शवयात्रा में उसका उपयोग लोग कर सके। इस सेवा को निगम 311 एप से जोड़ेगा। मेयर ने कहा कि पंचकुईया, जूनी इंदौर और रीजनल पार्क में भी यह ईकोफ्रेंडली शवदाह गृह लगाए जाएंगे। लोकार्पण के दौरान मिलिंद महाजन, सुरेश टाकलकर, तृप्ती महाजन, चंद्रकांत पराडकर सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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