झारखंड के इस पहाड़ पर बसे हैं बुढ़वा महादेव, 400 साल से हो रही पूजा, भर जाती है सूनी गोद!

आने वाले मार्च के महीने में शिवरात्रि का पर्व है. शिवरात्रि के दिन लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते है. यहां जलार्पण करने के लिए शिव मंदिर जाते है. हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के महुदी पहाड़ स्तिथ बुढ़वा महादेव मंदिर की महत्वता कुछ अलग ही है.

यहां जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने के श्रद्धालु साल भर आते है. कहा जाता है कि 500 मीटर ऊंचे पर स्थित यह मंदिर 400 साल से अधिक पुराना है. पहाड़ी पर होने के कारण यहां पूजा-पाठ के अलावा लोग पर्यटन के ख्याल से भी आते हैं. इस पहाड़ पर कई स्थानीय और भोजपुरी फिल्म की भी शूटिंग हो चुकी है.

यहां जलाभिषेक करने की परंपरा 17 वीं सदी पुरानी
मंदिर समिति के सुबेंद्र कुमार बताते है कि यहां जलाभिषेक करने की परंपरा 17 वीं सदी में कर्णपुरा राज्य के राजा दलेल सिंह ने शुरू की थी. रामगढ़ राज्य की राजधानी बादाम बड़कागांव हुआ करता था. राजा दलेल सिंह खुद बहुत बड़े शिव भक्त थे. उन्होंने अपने जीवन काल में भगवान शिव पर कई गीत लिखे थे. उन्होंने आगे बताया कि राजा के द्वारा निर्माण करवाए गए किले आज भी पहाड़ी में मौजूद है. उस समय जल अर्पण करने के लिए यहां पर तालाब बनवाया गया था. जिसे रानीपोखर के नाम से जाना जाता है. यहां कई शिवलिंग की स्थापना उस समय करवाई गई थी. जिसका प्रमाण अभी भी पहाड़ के गुफा में मौजूद है.

पहाड़ पर मौजूद है 4 गुफा
कांडतरी निवासी राज मेहता बताते है कि महूदी पहाड़ में शेषनाग शिलाएं हैं. रास्ते के दोनो तरफ ये शिलाएं आपको अपनी और बुलाएगी. पूरे पहाड़ में 4 गुफा देखा जा सकता है. इन गुफाओं में पूजा अर्चना करने से मन्नत पूरी हो जाती है.वहीं, मंदिर पुजारी हेमराज महतो ने कहा कि राजा के द्वारा उस समय शिलाएं में पूजा पाठ की जाती थी. लेकिन मन्दिर के भवन का निर्माण 1960 में किया गया है. बड़कागांव के निवासी थानेदार यादव को पुत्र नहीं था. उन्होंने बाबा से मन्नत मांगी. बाबा ने आशीर्वाद दिया. पुत्र प्राप्ति के बाद यहां थानेदार यादव ने इस मंदिर भवन का निर्माण करवाया. यहां लोग पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगने आते हैं.
 

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