यहां पिंडी स्वरूप में चंचली माता, दर्शन को दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु, पूरी होती है हर मनोकामना

बोकारो के माराफारी में स्थित मां चंचली मंदिर बोकारो के प्राचीन दुर्गा मंदिरों में से एक है. यहां बीते 100 वर्षों से विधिवत पूजा अर्चना हो रही है. यहां श्रद्धालु दूर-दूराज इलाकों से आस्था के साथ पिंडी स्वरूप चंचली दुर्गा माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

मंदिर के पुजारी गोपाल पांडे ने‌ लोकल 18 ने कहा कि चंचली दुर्गा माता मंदिर का इतिहास 100 वर्ष से भी अधिक पुराना है. जब बोकारो के जमींदार ठाकुर सरयू प्रसाद सिंह ने‌ गावं के लोगों कि बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की थी. यहां विधिवत तरीके से चैत्र नवरात्र और शरद नवरात्र के दोरान पूजा अर्चना होती है .वहीं साल 1971 मे मंदिर की स्थिति को ध्यान रखते हुए इसका पुनर्निर्माण किया गया था. जिससे बाद में मंदिर की शोभा और बढ़ गई.

प्राप्त होती है मन की शांति
यहां अक्सर लोग विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान जैसे विवाह, गाड़ी पूजन के लिए भी आते हैं. वहीं, चैत्र नवरात्र के दोरान मंदिर में अखंड कीर्तन और देवी पाठ होता है. श्रद्धालु के बीच महाप्रसाद खिचड़ी का भी विवरण किया जाता है. वहीं, मंदिर में पूजा अर्चना करने आए श्रद्धालु शुभ नारायण झा ने बताया कि चंचली दुर्गा माता मंदिर बोकारो के प्रसिद्ध मंदिरों में यहां दर्शन मात्र ही शांति का अनुभव होता है. यहां पूजा करने आए श्रद्धालु के मनोकामना पूर्ण होती है. मां चंचली की विशेष कृपा प्राप्त होती है.वहीं चंचली मंदिर के परिसर में हनुमान, मंदिर और शिव मंदिर भी मौजूद हैं.
 

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