ग्रहों के दुष्प्रभाव को करेगा कम, कालाष्टमी पर भैरव देव को करें प्रसन्न, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

कालाष्टमी का दिन काल भैरव को समर्पित किया गया है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन काल भैरव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. माना जाता है कि काल भैरव की पूजा करने से तंत्र और मंत्र की सिद्धि प्राप्त होती है लेकिन इसके लिए निशिता मुहूर्त में पूजा की जाती है. इसके साथ ही अगर कालाष्टमी के दिन कुछ विशेष मंत्रों का जाप किया जाए तो भैरव देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भय, दुख सहित कई समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है. इसके अलावा माना जाता है कि यदि इस दिन भगवान शिव के स्वरूप काल भैरव की विधि पूर्वक पूजा अर्चना की जाए तो जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है. 

कौन हैं काल भैरव?
काल भैरव देव को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि काल भैरव भगवान शिव के पांचवें अवतार भी थे. इसलिए इस दिन काल भैरव की पूजा विधि विधान से करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है.

मासिक कालाष्टमी पूजा मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 30 मई गुरुवार को सुबह 11:44 बजे प्रारंभ होगी और 31 मई 2024 की सुबह 09:38 बजे समाप्त होगी. चूंकि उदया तिथि मान्य होती है तो इसके अनुसार ज्येष्ठ महीने की कालाष्टमी 30 मई गुरुवार के दिन मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत रखा जाएगा.

कालाष्टमी पूजा विधि
-कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें.
-इसके बाद मंदिर में एक चौकी पर कालभैरव की मूर्ति स्थापित करें.
-इसके बाद उनका पंचामृत से अभिषेक करें.
-फिर इन्हें चौकी पर स्थापित करने के बाद इत्र और फूलों की माला चढ़ाएं और चंदन का तिलक लगाएं.
-इसके बाद भगवान काल भैरव की विधिवत पूजा-अर्चना करें.
-इस दिन काल भैरव अष्टक का भी पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है.

कालाष्टमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप
1. ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्.
2. ॐ भयहरणं च भैरव:
3. ॐ कालभैरवाय नम:
4. ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं.
5. ॐ तीखदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्, भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि.
6. ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं.
7. अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि.
 

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