तालाब के सुधारने के नाम पर 1000 साल पुराना खजुराहो बांध क्षतिग्रस्त, एएसआई ने निगम को दिया नोटिस

मंदिरों के शहर खजुराहो में एक 1,000 साल पुराना बांध जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है नगर निगम द्वारा किए जा रहे सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट’ के कारण अपूरणीय रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई ने संरक्षित वामन मंदिर के पास कथित अवैध खनन के लिए खजुराहो के मुख्य नगर अधिकारी को नोटिस जारी किया है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि यह काम वैध अनुमति के साथ किया जा रहा है। भगवान विष्णु के पांचवें अवतार को समर्पित वामन मंदिर का निर्माण 1050 ईस्वी से 1075 ईस्वी के बीच हुआ था और यह यूनेस्को साइट खजुराहो स्मारक समूह का हिस्सा है। इसी मंदिर के पास एक तालाब है, जिसे नगर निगम सुधारने का काम कर रहा है। इसके पास ही करीब में एक बांध है, जो चंदेला राजवंश के समय का है। वामन मंदिर प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष नियम, 1959 के तहत संरक्षित है। 100 मीटर के दायरे और परिधि से 200 मीटर के दायरे में कोई खनन या निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। बांध संरक्षित स्थल से लगभग 70 मीटर पश्चिम में है।एएसआई जबलपुर सर्कल ने खजुराहो के मुख्य नगर अधिकारी बसंत चतुर्वेदी को बांध को हुए नुकसान के बारे में नोटिस जारी किया है। साथ ही सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मंदिर के पास हुए अवैध खनन पर एएसआई का सख्त रवैया देखने को मिल रहा है। इस मामले के और नोटिस के बारे में पूछे जाने पर पुरातत्वविद् जबलपुर सर्कल शिवकांत बाजपेयी ने कहा कि हम नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं ।

एएसआई से एनओसी के बाद शुरू हुआ काम

नगर निगम के अधिकारियों ने इन दावों का खंडन किया। सीएमओ चतुर्वेदी ने मीडिया को बताया कि हमारे पास सभी वैध अनुमतियां हैं। एएसआई से एनओसी प्रमाण पत्र लेने के बाद काम शुरू किया गया था। हम अमृत-II योजना के तहत तालाब का सौंदर्यीकरण कर रहे हैं। एएसआई नोटिस के बारे में पूछे जाने पर चतुर्वेदी ने कहा कि मुझे ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है। वहीं जिला कलेक्टर संदीप जीआर ने कहा कि मैं नोटिस की कॉपी मिलने के बाद इस पर गौर करूंगा। नगर निगम ने जो बांध तोड़ा है, वह ऐतिहासिक है। यह मंदिर के समकालीन है। यह एक गंभीर अपराध है। मैंने उपखंड मजिस्ट्रेट और स्थानीय एएसआई अधिकारियों से शिकायत की है। लगेगा तो एएसआई मुख्यालय में भी शिकायत दर्ज कराऊंगा। अगर जरूरत पड़ी तो मैं हाईकोर्ट जाऊंगा।

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