तेलंगाना सरकार की वित्तीय हालत खस्ता, जरुरत से ज्यादा लिया कर्ज

हैदराबाद। तेलंगाना में बजट सत्र से पहले पैसे की कमी है। पहले 297 करोड़ का फायदा होने वाला था, लेकिन जनवरी तक 26,050 करोड़ का घाटा हो गया। सरकार की जेब खाली हो रही है। अगर तीन बड़ी योजनाओं शुरू हो गई तो ये और भी बढ़ जाएगा। पहली योजना रायतू भरोसा है। इसमें किसानों को हर साल प्रति एकड़ 12 हजार मिलेंगे। दूसरी योजना इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा है। इसमें भूमिहीन मजदूरों को 12 हजार सालाना मिलेंगे। तीसरी योजना इंदिराम्मा इंदुलू है। इसमें बेघर लोगों को घर बनाने के लिए पांच लाख की मदद दी जाएगी।
तेलंगाना सरकार ने जरुरत से ज्यादा कर्ज ले लिया है। 49,255 करोड़ के बजट की जगह जनवरी तक 58,596 करोड़ का कर्ज लिया गया। इसमें से 10,386 करोड़ तो सिर्फ एक महीने में ही लिया। चुनाव में महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपए देने का वादा भी अभी पूरा नहीं हुआ है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने सीएम ए रेवंत रेड्डी को विधानसभा में राज्य के वित्त पर बहस के लिए चुनौती दी है। केटीआर ने सीएम रेड्डी पर राज्य को गलत प्रबंधन और झूठे प्रचार से वित्तीय संकट में धकेलने का आरोप लगाया है। 
केटीआर ने कहा कि हिम्मत है, तो आइए तथ्यों पर बहस करें। हम बताएंगे कि कैसे कांग्रेस की लापरवाह नीतियां तेलंगाना को बर्बाद कर रही हैं। जनता को सच्चाई जानने का हक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना की प्रगति के बारे में झूठ फैला रही है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई हमारे राज्य का अपमान करेगा या उसे कम आंकने की कोशिश करेगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे। केसीआर के नेतृत्व में तेलंगाना की उपलब्धियों को झूठ और प्रचार से मिटाया नहीं जा सकता।
बीआरएस नेता ने कहा कि राज्य सांख्यिकी की रिपोर्ट जो एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज है, ने सच्चाई सामने ला दी है। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट रेवंत रेड्डी के बढ़ते कर्ज के बयानों का खंडन करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने खुद एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें दिखाया गया है कि केसीआर के नेतृत्व में तेलंगाना की वित्तीय स्थिति कैसे मजबूत हुई। फिर भी रेवंत झूठ फैला रहे हैं। 
रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2014 में पांच लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2023 तक 15 लाख करोड़ रुपए हो गया, यानी 300 फीसदी की बढ़ोतरी। केटीआर ने जोर देकर कहा कि इस विकास ने तेलंगाना को गुजरात जैसे औद्योगिक रूप से उन्नत राज्यों से आगे रखा है। 

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