वर्धमान नगर कॉलोनी में वाहन पार्किंग की अव्यवस्था, सोसायटी अध्यक्ष ने बताया समस्या का कारण

राजधानी रायपुर के देवपुरी में वर्धमान नगर के रहवासियों द्वारा अवैध पार्किंग, नशाखोरी, जुआखोरी, कचरा डंपिंग के विरुद्ध किया जा रहा विरोध बढ़ता ही जा रहा है। समस्या से परेशान यहां के रहवासी विरोध कर रहे हैं, शिकायत भी कर रहे हैं। मगर, समाधान करने वाले मामले को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं।

अब तक कार्रवाई पूरी तरीके से बेनतीजा रही है। जिम्मेदार अधिकारी आपस में पत्राचार कर एक दूसरे के ऊपर मामला डालते जा रहे हैं। बता दें कि पांच जनवरी को इसी मामले को लेकर सोसायटी के अध्यक्ष विवेकानंद भट्टाचार्य और अवैध तरीके से गाड़ी पार्क करने वाले योगेश सैनी के बीच बातों ही बातों में मारपीट भी हो गई थी, जिसके बाद मामला थाने भी गया था।

जनवरी में ही रहवासियों के अनुरोध पर क्षेत्रीय विधायक मोतीलाल साहू ने आयुक्त नगर निगम को आदेश जारी कर यह भी कहा था कि यहां के रहवासियों की समस्या का समाधान किया जाए। वहीं, एसडीएम द्वारा भी नगर निगम और संबंधित थाने को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। सब कुछ होने के बाद भी इस मामले पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अतिक्रमण कर मार्ग बाधित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। इस क्षेत्र में भी अवैध पार्किंग व अतिक्रमण को लेकर समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। इस मामले को भी संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी। 

हो रही है अवैध वसूली भी
देवपुरी में गुंडागर्दी के साथ अवैध वसूली भी की जाती है। यहां के रहवासी बताते हैं कि कुछ लड़के अवैध तरीके से पार्किंग के नाम पर वसूली करते हैं। वो सड़कों पर गाड़ी भी खड़ी कराते हैं, जबकि पूरा क्षेत्र नो पार्किंग जोन है।

नगर निगम को भी इसकी जानकारी दी गई है। मगर, निगम के अधिकारी और कर्मचारी मामले को देखने तक नहीं आए। हर माह लाखों की प्रोटेक्शन मनी लेते थे छत्तीसगढ़ के IPS,रूटीन निरीक्षण के दौरान मैंने देवपुरी का भी भ्रमण किया है। मामले को संज्ञान में लेकर लोगों की परेशानी दूर करने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

कॉलोनी से निकलना भी मुश्किल
वर्धमान नगर के रहवासियों के लिए कॉलोनी से निकलना तक मुश्किल हो चुका है। सोसायटी के अध्यक्ष विवेकानंद भट्टाचार्य बताते हैं कि कॉलोनी के गेट से लेकर पूरे क्षेत्र में अवैध तरीके से वाहन खड़े किए जाते हैं। विरोध करने पर मारपीट व गाली-गलौज पर उतारू होते हैं।

संबंधित थाने से लेकर सभी प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को समस्या बता चुके हैं। आश्वासन जरूर मिलता है, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं किया जा रहा है। बस नगर निगम पुलिस से पत्राचार करता है, वहीं पुलिस भी नगर निगम के साथ पत्राचार करती है।

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