यूक्रेन को मिलेगी तकनीकी और सामरिक बढ़त, रूस की रणनीति पर पड़ेगा असर

यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध में अब यूरोपीय देश यूक्रेन को और ज्यादा मदद दे रहे हैं। ब्रिटेन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह यूक्रेन को 450 मिलियन पाउंड (लगभग 580 मिलियन डॉलर) की सैन्य सहायता देगा।

यह सहायता यूक्रेन की रक्षा को मज़बूत बनाने और भविष्य में किसी भी शांति समझौते से पहले उसे मजबूत स्थिति में लाने के लिए दी जा रही है। इस सहायता में से 350 मिलियन पाउंड ब्रिटेन के इस साल के 4.5 बिलियन पाउंड के सैन्य सहायता पैकेज से दिए जाएंगे। इसके साथ ही नॉर्वे भी इस पैकेज में अपना योगदान देगा।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली और जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने ब्रसेल्स में 'यूक्रेन डिफेंस कॉन्टैक्ट ग्रुप' की बैठक की अध्यक्षता की। यह ग्रुप नाटो और अन्य सहयोगी देशों का एक समूह है, जो यूक्रेन की सहायता कर रहे हैं।

मदद में मिलेंगे हथियार, ड्रोन और मरम्मत की सुविधा
इस सहायता पैकेज के तहत यूक्रेन को हथियारों और उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए जरूरी चीजें मिलेंगी। साथ ही इसमें रडार सिस्टम, एंटी-टैंक माइंस और लाखों की संख्या में ड्रोन भी शामिल हैं।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री हीली ने कहा कि "यूक्रेन डिफेंस कॉन्टैक्ट ग्रुप" का काम बहुत जरूरी है ताकि यूक्रेन को मजबूत स्थिति में लाया जा सके और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाया जा सके कि वह यह युद्ध समाप्त करें।

उन्होंने आगे कहा, "हम शांति को खतरे में नहीं डाल सकते, इसलिए आज का यह बड़ा सहायता पैकेज यूक्रेन की अग्रिम पंक्ति में लड़ाई को मजबूत बनाएगा।"

शांति समझौते के लिए भी हो रही है तैयारी
गुरुवार को ही ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक विशेष बैठक हुई, जिसे "कोएलिशन ऑफ द विलिंग" कहा गया। इस बैठक में उन देशों के रक्षा मंत्री शामिल हुए जो युद्ध समाप्त होने की स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए तैयार हैं।

यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि अगर रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता होता है, तो तुरंत वहां स्थिरता और शांति स्थापित की जा सके। इसमें शांति सैनिकों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार किया जा रहा है।

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