मंदी की आशंका, महंगाई का खतरा… ट्रंप के 100 दिन में कहां से कहां पहुंच गई अमेरिका की इकॉनमी!

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर एक के बाद एक कई ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। खासकर कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है। फिलहाल इसमें 90 दिन की राहत दी गई है। लेकिन उनके इस कदम से दुनियाभर में हाहाकार मचा है। हर जगह मंदी की चर्चा है। माना जा रहा है कि इससे महंगाई में भी भारी बढ़ोतरी हो सकती है। आईएमएफ ने कई देशों के जीडीपी अनुमान को घटा दिया है। शेयर बाजारों में भारी उथलपुथल की स्थिति है। अमेरिका को फिर से महान बनाने का मूलमंत्र लेकर चलने वाले ट्रंप के 100 दिन के कार्यकाल में अमेरिका कहां से कहां पहुंच गया है?

ट्रंप के आर्थिक एजेंडे खासकर उनकी टैरिफ योजनाओं को लेकर भ्रम से दुनियाभर में अनिश्चितता का माहौल है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका बहुत लचीली अर्थव्यवस्था है। यह मुश्किलों का सामना कर सकती है और आगे बढ़ती रह सकती है। लेकिन इसे अनिश्चितता बिल्कुल पसंद नहीं है। टैरिफ से कीमतें बढ़ती हैं और वे विकास को प्रभावित करते हैं। ट्रंप प्रशासन बार-बार बदलते दृष्टिकोण से चीजों को बदतर बना रहा है। अनिश्चितता का स्तर आवश्यकता से अधिक है। इस कारण मांग कम हो रही है, कंपनियां निवेश को रोक रही हैं और लोग खर्च करने से बच रहे हैं।

अलग-थलग पड़ा अमेरिका

उपभोक्ता विश्वास हाल के महीनों में पहले ही गिर रहा है। उसे और झटका लग सकता है। इससे उपभोक्ता खर्च में गिरावट आ सकती है जो कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। डेल्टा एयरलाइन्स ने हाल में अपने प्रॉफिट के आउटलुक को कम करते हुए चेतावनी दी कि बिगड़ता कॉर्पोरेट और उपभोक्ता विश्वास ट्रैवल की डिमांड को नुकसान पहुंचा रहा है। अर्थव्यवस्था पर एक और संभावित चेतावनी संकेत में कॉर्पोरेट दिवालिया होने शुरू हो रहे हैं। S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के अनुसार 2025 के पहले दो महीनों में अमेरिकी कॉर्पोरेट दिवालियापन के मामले 129 थे जो 2010 के बाद सबसे अधिक है।

ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका को एक वैश्विक व्यापार युद्ध के अकेले केंद्र में ला दिया है। ग्लोबल इनवेस्टर डॉलर और ट्रेजरी जैसी अमेरिकी एसेट्स से अपना पैसा निकाल रहे हैं। वे अमेरिका की स्थिरता को लेकर चिंतित हैं। इस कारण पिछले एक महीने में बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। ट्रंप के टैरिफ के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था कुछ प्रमुख मेट्रिक्स द्वारा अच्छी स्थिति में है। मसलन बेरोजगारी कम है और महंगाई 2.5% पर है।

फौरी राहत नहीं

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि शॉर्ट टर्म में ट्रंप के टैरिफ के प्रभाव का आकलन करना मुश्किल होगा। लेकिन लंबी अवधि में मंदी की आशंका बहुत बढ़ गई है। कंपनियों को समझ नहीं आ रहा है कि ट्रंप टैरिफ पर टिके रहेंगे या नहीं। उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास डगमगा रहा है। ट्रंप की योजना में ऐसा कुछ नहीं है जिससे लोगों को महंगाई से तुरंत राहत मिल सके। लोगों में रोष बढ़ रहा है।

SSRS द्वारा किए गए एक नए पोल में पाया गया कि देश में 59% लोग मानते हैं कि ट्रंप की नीतियों ने आर्थिक स्थितियों को खराब कर दिया है। 60% अमेरिकी एडल्ट्स का कहना है कि ट्रंप की नीतियों के कारण देश में महंगाई बढ़ी है। लगभग 70% लोगों ने अगले साल मंदी आने की आशंका जताई है। एयरलाइन कंपनियां गर्मियों के यात्रा सीजन से पहले उड़ानें कम कर रही हैं क्योंकि कम लोग यात्रा की योजना बना रहे हैं।

चीन से टैरिफ

चीन से अमेरिका में माल ले जाने वाले शिपमेंट के आने वाले दिनों में भारी गिरावट की आशंका है। जानकारों के मुताबिक चीन से अमेरिका के लिए कंटेनर बुकिंग में तीन हफ्तों 60% से अधिक गिरावट आई है। अमेरिका ने चीन पर 145 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 125 फीसदी टैरिफ लगाया है। हालांक हाल के दिनों में ट्रंप के तेवर कुछ ढीले पड़े हैं लेकिन वह चाहते हैं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग टैरिफ पर बातचीत की शुरुआत करें।

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