बड़वानी के हरिबड़ गांव में मोटे अनाज व दालों के संरक्षण के साथ रोजगार का सृजन

बड़वानी ।   बड़वानी जिले के गांव हरिबड़ की मंजू गेहलोत के नेतृत्व में महिलाएं प्राकृतिक और देसी अनाज के साथ ही नई किस्म को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही हैं। खासकर निमाड़ी देसी किस्म की जैविक हल्दी और लाल मिर्च की प्राकृतिक खेती व मसालों के साथ ही मोटे अनाज व देसी दालों के बीज एकत्रित कर पैकिंग के माध्यम से बाजार में बेच रही हैं। इससे 100 महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। मंजू गेहलोत बताती हैं कि गांव की दस महिलाओं के साथ उन्होंने निमाड़ महिला स्वसहायता समूह का गठन किया और क्षेत्र में निमाड़ी मिर्च, हल्दी, धनिया सहित अन्य मसालों की खेती के साथ ही कुटीर उद्योग शुरू किया।

श्री अन्न की कर रही पैकिंग

बड़वानी जिले के किसानों से ही मिर्च, हल्दी, अदरक, धनिया व अन्य मसाले लेकर इन्हें पीसकर इनकी पैकिंग कर समूह के माध्यम से बाजार तक पहुंचा रही हैं। इसके अलावा श्री अन्न में मोटे अनाज जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा के साथ ही दलहन में चना, तुअर, मूंग व अन्य दालों की भी पैकिंग कर रही हैं। समय-समय पर विविध प्रदर्शनियों में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए मसाले, अन्न व दालों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

प्राकृतिक खेती को दिया बढ़ावा

मंजू दीदी व इनकी टीम की महिलाओं ने छोटे से ग्राम हरिबड़ से एक बेहतर शुरुआत की। आठ साल से कृषक परिवारों की महिलाओं के साथ मिलकर निमाड़ी किस्मों के मसालों की खेती, मोटे अनाज और दालों की विविध किस्मों की बचत व पैकिंग को बढ़ावा दे रही हैं। रासायनिक खेती के बजाय देसी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही है। इनका प्रयास सराहनीय है।

– योगेश तिवारी जिला परियोजना प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला पंचायत, बड़वानी

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