स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने निकले पिता-पुत्र:11 महीनों में 30 राज्यों की यात्रा कर पहुंचे भोपाल, राजस्थान में करेंगे समापन

देश को विश्वगुरु बनाने और स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पिता-पुत्र की जोड़ी पिछले 11 महीनों से भारत भ्रमण पर है। इस दौरान वो 30 राज्य घूम चुके है और अब मध्यप्रदेश में है।

जयपुर के रहने वाले गोविंद छीपा अपने 7 साल के पुत्र सहज छीपा के साथ यात्रा पर है। बुधवार को वे अपनी "विवेकानंद ज्ञान ज्योति यात्रा" के तहत भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों से संवाद कर नशा मुक्ति, शिक्षा, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बात की।

अगस्त 2024 को दिल्ली से हुई थी शुरुआत

पिता-पुत्र की इस यात्रा की शुरुआत 15 अगस्त 2024 को दिल्ली से हुई थी। यात्रा को दिल्ली के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह यात्रा आगामी 15 अगस्त 2025 को गुजरात और राजस्थान के अंतिम दौरों के साथ खत्म होगी।

राधा गोविंद का कहना है, “मैं जब भी गरीब बच्चों और नशे से जूझते युवाओं को देखता था, तो अंदर से व्यथित हो जाता था। तभी मैंने फैसला लिया कि देश के लिए कुछ करना है। मैं किसी संस्था या मिशनरी से नहीं जुड़ा हूं, क्योंकि मेरी सोच स्वतंत्र है।”

मिशन सिर्फ प्रचार नहीं, सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम

राधा गोविंद बताते हैं कि इस यात्रा का मकसद सिर्फ विचारों का प्रचार नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता फैलाना है। वे अपने बेटे सहज के साथ गांव-गांव जाकर स्कूलों, चौपालों और सभाओं में लोगों से संवाद करते हैं। पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर विशेष रूप से लोगों को सचेत कर रहे हैं।

एक बच्चे की सोच, एक पिता का संकल्प – बन रही है राष्ट्रीय मिसाल

सात साल का सहज छीपा इस पूरी यात्रा में अपने पिता के साथ न केवल हर जगह जा रहा है, बल्कि बच्चों से संवाद भी करता है। राधा गोविंद ने बताया, “मेरा बेटा शायद भारत का पहला ऐसा बच्चा है जिसने इतनी लंबी यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी की है। हम अपनी कार से अलग-अलग राज्यों और गांवों तक जाते हैं, लोगों से मिलते हैं और देश के लिए कुछ करने का संदेश देते हैं।”

साहस क्रांति और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

एक सफल व्यवसायी रह चुके राधा गोविंद अब पूरी तरह से देश सेवा को समर्पित हैं। वे कहते हैं कि "साहस क्रांति – एक सोच" और "हम आत्मनिर्भर फाउंडेशन" जैसे सामाजिक मंचों के माध्यम से जागरूकता फैलाना और जमीनी स्तर पर कार्य करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।

1 लाख बच्चों को स्कूल से जोड़ने का संकल्प

इस अभियान के तहत राधा गोविंद ने 1 लाख बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिया है। उनका लक्ष्य है कि भीख मांगने वाले, नशे के शिकार और बेसहारा बच्चों को स्कूल भेजा जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

देशभर से मिल रहा समर्थन

इस यात्रा में प्रशासनिक विभाग, पुलिस विभाग और स्थानीय नागरिकों से उन्हें लगातार समर्थन मिला है। भोपाल में भी उनकी पहल को सराहा गया और कई युवा उनके साथ जुड़ने के लिए आगे आए।

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