अनाथ बच्ची की धड़कनों में लौटी जिंदगी:राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बना सहारा, जन्मजात हृदय रोग की हुई सफल सर्जरी

भोपाल के एक अनाथाश्रम में पली एक मासूम की मुस्कान मानो थम गई थी। जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी ने उसके जीवन को खतरे में ला दिया था। ना परिवार था, ना ही इलाज के लिए साधन लेकिन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और डॉक्टरों की संवेदनशील पहल ने इस बच्ची को नया जीवन दे दिया।

भोपाल के अनाथाश्रम में रह रही इस एक साल की बच्ची की तकदीर उस दिन बदल गई जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम फील्ड दौरे पर वहां पहुंची। चिकित्सकीय टीम में शामिल डॉ. सोनल जैन और डॉ. दिलीप बरगड़िया ने स्क्रीनिंग के दौरान बच्ची में हृदय रोग की आशंका जताई और उसे जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र रेफर कर दिया।

आगे की जांच में पता चला कि बच्ची को जन्मजात हृदय रोग (Patent Ductus Arteriosus – PDA) है, जिसकी तुरंत सर्जरी जरूरी थी। CMHO डॉ. मनीष शर्मा ने बिना देरी किए सर्जरी की अनुमति दी और सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं। 24 जून को एम्स भोपाल में जटिल हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और फिर से अनाथाश्रम में लौट आई है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम साल 2013 में शुरू हुआ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की बीमारियां, कमियां, विकास में देरी और जन्मजात दोष की पहचान और उपचार सुनिश्चित करता है। मोबाइल RBSK टीमें आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं। इस दौरान चिह्नित बच्चों को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र भेजकर उपचार की व्यवस्था की जाती है।

निशुल्क सर्जरी और विशेष उपचार

CMHO डॉ. शर्मा ने बताया कि RBSK के तहत जन्मजात हृदय रोग, कॉकलियर इंप्लांट, क्लब फुट, क्लेफ्ट लिप, क्लेफ्ट पैलेट जैसी गंभीर बीमारियों की सर्जरी पूरी तरह निशुल्क कराई जाती है। इस योजना का उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे का जीवन केवल आर्थिक कारणों से न रुके।

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