मेट्रोपॉलिटन-एक्ट पर चर्चा के दौरान सिंघार और विजयवर्गीय हुए आमने-सामने
मप्र के दो शहर, भोपाल और इंदौर, को महानगर बनाने के लिए विधानसभा में मंगलवार को मप्र महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास विधेयक 2025 बिल (मेट्रोपॉलिटन ) सर्वसम्मति से पास हो गया है। अब महानगर योजना समिति और महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन होकर काम शुरू हो सकेगा। लेकिन इस बिल पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि यह बिल तो ले आए, भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान कब लेकर जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल में किसानों की जमीनें कौड़ियों के दाम पर अधिग्रहित की जाएंगी, उन्हें बाजार मूल्य दिया जाए। सिंघार ने कहा कि जनता की आपत्तियों को 30 दिन में निपटाने की समयावधि भी गलत है। इसे बढ़ाना चाहिए। इसके जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह बात सही है कि हमसे मास्टर प्लान लाने में देरी हुई है, लेकिन अब यह जल्दी आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बिल से मप्र का ही विकास नहीं होगा, किसान भी करोड़पति और अरबपति हो जाएंगे। विजयवर्गीय ने बताया कि देश में जहां भी मेट्रोपॉलिटन बने हैं, उनका हमने गहन अध्ययन किया और एक भी ऐसा नहीं, जिसकी अध्यक्षता सीएम करते हों। लेकिन हमारे यहां इसकी अध्यक्षता सीएम खुद करेंगे।
साथ ही मेट्रोपॉलिटन के दायरे में आने वाली सभी इकाइयों के प्रतिनिधि इसमें सदस्य होंगे। फिर चाहे वो महापौर हों, नगर पालिका के जिला पंचायत और नगर परिषद या नगर पंचायत के अध्यक्ष हों। सभी एमएलए शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि बिल आने के बाद शहरों में पार्क के भीतर 50% हिस्से में घने वन बनाने को अनिवार्य कर दिया जाएगा।
विधायकों ने दिए सुझाव और की संशोधन की मांग
इस बिल के समर्थन में बोलते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कॉलोनियों में 30 फीट चौड़ी सड़क, नाली और सीवेज का प्रावधान व अनिवार्यता की मांग की। वहीं, डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि इसमें नर्मदापुरम और इटारसी को शामिल किया जाए। ओमप्रकाश सखलेचा ने नीमच और मंदसौर को शामिल करने की मांग की।
विपक्ष की तरफ से विधायक जयवर्धन सिंह ने दिल्ली एनसीआर से सबक लेने की बात कही। डॉ. हीरालाल अलावा ने महानगर दायरे में आने वाले आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को स्वतंत्र होकर निर्णय लेने देने की मांग की। ओमकार सिंह ने जबलपुर को शामिल करने की तो फूल सिंह बरैया ने कहा कि महू क्षेत्र से मिलिट्री हटाकर उसे अंबेडकर स्थल के नाम किया जाए।
21 महीने में घट गईं 4 लाख लाड़ली बहनें, राशि 3 हजार करने का कोई प्रस्ताव नहीं
प्रदेश में 21 महीनों में लगभग 4 लाख (3 लाख 98 हजार 432) लाड़ली बहनें कम हो गई हैं। विधानसभा चुनाव से पहले, सितंबर 2023 में प्रदेश में कुल लाड़ली बहनों की संख्या 1 करोड़ 30 लाख 46 हजार 216 थी। जून 2025 की स्थिति में, प्रदेश में लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों की संख्या घटकर 1 करोड़ 26 लाख 47 हजार 784 रह गई है।
मंगलवार को एक सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने यह जानकारी दी। भूरिया ने बताया कि वर्ष 2023 के सितंबर महीने में 6 लाख 339 नई महिला आवेदकों के नाम लाड़ली बहना योजना में जोड़े गए थे। इसके बाद से अब तक कोई नाम इस योजना में नहीं जोड़ा गया है। वर्तमान में नए नाम जोड़ने और राशि बढ़ाकर 3 हजार करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
