50 हजार निर्माणाधीन और 8700 से ज्यादा का काम अटका

प्रदेश में अंतिम बार वर्ष 2023-24 में 16 जिलों के लिए स्वीकृत हुए थे 9194 पीएम आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (बीएलसी घटक) की रफ्तार अब अंतिम पड़ाव पर है। प्रदेश में 1 अप्रैल 2018 से जुलाई 2025 तक कुल 4.66 लाख घर स्वीकृत हुए, जिनमें से 4.07 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है।

यह कुल लक्ष्य का 87.30 प्रतिशत है। इसके अलावा 50 हजार से अधिक आवासों का काम अभी जारी है, जबकि करीब 8700 से ज्यादा घर ऐसे हैं जिनका निर्माण शुरू तक नहीं हो पाया है। दिलचस्प है कि पिछले डेढ़ साल से योजना में एक भी नया केस स्वीकृत नहीं हुआ।

वर्ष 2023-24 में अंतिम बार नर्मदापुरम, सागर, आगरमालवा, अनूपपुर, अशोकनगर, दतिया, देवास, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, रायसेन, मंदसौर, विदिशा, निवाड़ी, मुरैना और बुरहानपुर जिले शामिल रहे थे, जहां कुल 9194 आवासों की स्वीकृति दी गई थी। उसके बाद से पूरे प्रदेश में नए प्रपोजल पर मुहर तक नहीं लगी है।

सागर टॉप पर, बाकी कई जिले मिलकर भी पीछे

नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए भूपेंद्र सिंह (वर्तमान विधायक) ने अपने गृह जिले सागर में पीएम आवास स्वीकृत कराने का नया रिकॉर्ड बनाया। यहां 56 हजार 856 आवास स्वीकृत हुए, जो पूरे प्रदेश में छह साल में मंजूर हुए कुल आवासों का 12% से भी अधिक है।

यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि प्रदेश का कोई और जिला चाहे वह राजधानी भोपाल हो या इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर इसकी बराबरी तक नहीं कर पाया। सागर में 89% मकानों का निर्माण पूरा भी हो चुका है। सागर के बाद सबसे अधिक स्वीकृति राजगढ़ में 17310, रायसेन में 16188, गुना में 16092, उज्जैन में 15913 और देवास में 15711 आवासों के लिए दी गई।

भिंड और दमोह में 2021-22 के बाद स्वीकृति नहीं

भिंड और दमोह समेत अलीराजपुर, बड़वानी और भोपाल जैसे जिलों में वर्ष 2021-22 के बाद से प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत एक भी केस स्वीकृत नहीं हुआ है। साढ़े तीन साल पहले इन जिलों में अंतिम बार 11 हजार 825 आवासों की मंजूरी दी गई थी।

निर्माण में आगर-शाजापुर अव्वल, दमोह और दतिया हैं फिसड्डी

स्वीकृत पीएम आवास की तुलना में निर्माण कार्य पूरा करने में आगरमालवा, शाजापुर और इंदौर जिले अव्वल साबित हुए हैं। यहां 95% से अधिक मकानों का काम पूरा हो चुका है। उज्जैन में 93% जबकि खरगोन, बैतूल, भोपाल और रतलाम में 92% निर्माण हो गया है। राजगढ़, बड़वानी और देवास में यह आंकड़ा 91% तक पहुंचा, वहीं खंडवा और मंदसौर में भी 90% आवास तैयार हो गए हैं। इसके उलट दमोह और दतिया जिले सबसे पीछे रहे, जहां दो साल बाद भी 29% मकानों का काम पूरा नहीं हो सका।

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