अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारत के सपोर्ट में चीन:चीनी राजदूत बोले- चुप रहे तो दबंगई बढ़ेगी, भारत-चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार हैं

चीन के राजदूत शू फीहोंग ने गुरुवार को भारत पर लगाए गए 50% अमेरिकी टैरिफ की निंदा की। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रोग्राम में कहा कि चीन इसका कड़ा विरोध करता है। चुप रहने से दबंगई को बढ़ावा मिलता है। चीन भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।

फीहोंग ने भारत और चीन के बीच रणनीतिक भरोसे और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं और मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए।

चीनी राजदूत ने कहा- भारत और चीन को आपसी संदेह से बचना चाहिए और रणनीतिक भरोसे को बढ़ाना चाहिए। दोनों देशों के लिए एकजुटता और सहयोग ही साझा विकास का रास्ता है।

अमेरिका ने भारत कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से एक्स्ट्रा 25% टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा। अमेरिका का कहना है कि भारत के रूसी तेल खरीदने की वजह से रूस को यूक्रेन जंग में मदद मिल रही है।

फीहोंग बोले- भारत-चीन दोस्ती दुनिया के लिए फायदेमंद

फीहोंग ने ग्लोबल हालात पर कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों से गुजर रही है और ऐसे में भारत-चीन रिश्तों का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने कहा- भारत और चीन एशिया की आर्थिक प्रगति के दो इंजन हैं। हमारी दोस्ती न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद है।

फीहोंग ने कहा कि SCO समिट के लिए पीएम मोदी चीन यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देगी।" यह विजिट 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होगी।

हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पीएम मोदी से मुलाकात कर उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का निमंत्रण सौंपा था। मोदी ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि वह शी जिनपिंग से तियानजिन में मुलाकात के लिए उत्सुक हैं।

भारत-चीन के रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे

चीनी राजदूत ने कहा कि पिछले साल रूस के कजान में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद भारत और चीन के रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं।

दोनों देश एक-दूसरे के हितों का सम्मान कर रहे हैं और आपसी समझ बढ़ा रहे हैं। इस दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होना भी एक बड़ा कदम है।

दोनों देश लिपुलेख के रास्ते फिर व्यापार शुरू करेंगे

भारत और चीन ने हाल ही में उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते फिर व्यापार शुरू करने पर सहमति जताई है। यह फैसला 18-19 अगस्त को चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान हुआ। बातचीत में लिपुलेख के साथ शिपकी ला और नाथु ला दर्रों से भी कारोबार बहाल करने का फैसला लिया गया।

भारत और चीन के बीच लिपुलेख के रास्ते 1954 से व्यापार हो रहा है, जो हाल के सालों में कोरोना और अन्य वजहों से रुका था। अब दोनों देशों ने इसे फिर शुरू करने का फैसला किया है। 

गलवान झड़प से बिगड़े थे भारत-चीन रिश्ते

15 जून 2020 को चीन ने ईस्टर्न लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में एक्सरसाइज के बहाने सैनिकों को जमा किया था। इसके बाद कई जगह पर घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं।

भारत सरकार ने भी इस इलाके में चीन के बराबर संख्या में सैनिक तैनात कर दिए थे। हालात इतने खराब हो गए कि LAC पर गोलियां चलीं।

इसी दौरान 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। बाद में भारत ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसमें करीब 60 चीनी जवान मारे गए थे।

इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे, लेकिन बाद में पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात से इनमें सुधार शुरू हुआ है।

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