6 कंटेंट क्रिएटर, जिन्होंने शौक को प्रोफेशन में बदला:अब इनके लाखों फालोअर्स

भोपाल सिर्फ झीलों का शहर ही नहीं, बल्कि अब युवा क्रिएटर्स की नई राजधानी भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया के दौर में जहां कंटेंट क्रिएशन एक करियर और पहचान दोनों बन चुका है, वहीं भोपाल के कई युवा अपनी क्रिएटिविटी और मेहनत से डिजिटल दुनिया में खास पहचान बना रहे हैं।

हाल ही में आयोजित भोपाल क्रिएटर समिट ने इस बात को साबित किया कि यह शहर अब देशभर में उभरते टैलेंट के लिए खास बन चुका है। इस समिट में अलग-अलग क्षेत्रों के युवा क्रिएटर्स शामिल हुए और अपनी यात्रा, संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं। यहां हम आपको बताते हैं उन 6 क्रिएटर्स के बारे में, जो भोपाल की युवा पीढ़ी को मोटिवेट कर रहे हैं।

नए नजरिए से कंटेंट क्रिएशन की ओर सोशल मीडिया की दुनिया में हर दिन हजारों नए क्रिएटर जुड़ते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपनी ऑरिजिनैलिटी और पैशन से आगे निकल पाते हैं। भोपाल के युवा क्रिएटर नमन उन्हीं में से एक हैं। नमन का कंटेंट ताजगी से भरा होता है, जिसमें न सिर्फ मनोरंजन है बल्कि सीख और प्रेरणा भी झलकती है।

शौक से शुरू हुआ सफर प्रोफेशन तक पहुंचा नमन बताते हैं कि उन्होंने कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत महज एक शौक के तौर पर की थी। कैमरा उठाना, छोटे-छोटे वीडियो बनाना और सोशल मीडिया पर अपलोड करना- यही उनकी दिनचर्या थी। लेकिन, धीरे-धीरे समझ में आया कि कंटेंट बनाना सिर्फ टाइमपास नहीं, बल्कि करियर का रास्ता भी हो सकता है।

नमन ने बताया-

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सबसे बड़ी दिक्कत थी निरंतरता बनाए रखना।कभी उनके वीडियो को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता, तो कभी हफ्तों तक व्यूज़ नहीं आते। लेकिन, इसे सीखने का मौका बनाया। तय किया कि चाहे वीडियो चले या न चले, मैं कंटेंट बनाना बंद नहीं करूंगा। सीखते-सीखते ही ग्रोथ होती है।

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क्रिएटिविटी से दिखाए तो लोग होते हैं आकर्षित नमन का मानना है कि हर साधारण चीज को भी अगर सही एंगल और क्रिएटिविटी के साथ दिखाया जाए, तो वह लोगों को आकर्षित कर सकती है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि ‘कंटेंट का मतलब सिर्फ एंटरटेन करना नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना और उनकी सोच को थोड़ा बदलना भी है।’

फूड और ASMR कंटेंट से कराया नया अनुभव सोशल मीडिया पर फूड कंटेंट की भरमार है। कहीं कोई नई डिश ट्राई कर रहा है, तो कहीं कोई स्ट्रीट फूड का रिव्यू कर रहा है। लेकिन, भोपाल के श्रेयश गुप्ता ने इससे अलग रास्ता चुना। उन्होंने खाने की दुनिया को ऑटोनॉमस सेंसरी मेरिडियन रिस्पॉन्स (ASMR ) के साथ एक अनोखे अंदाज में पेश किया। यानी सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि आवाज और अनुभव भी कंटेंट में शामिल होता है।

फूड और वीडियोग्राफी की दिलचस्पी को आगे बढ़ाया श्रेयश बताते हैं कि उन्हें शुरू से ही फूड और वीडियोग्राफी दोनों में दिलचस्पी थी। कॉलेज के दिनों में वे दोस्तों के साथ अलग-अलग रेस्टोरेंट्स जाते और मोबाइल से वीडियो शूट करते थे। धीरे-धीरे अहसास हुआ कि खाने की सिर्फ तस्वीर दिखाना काफी नहीं है, बल्कि खाने की आवाज और मूड भी लोगों को आकर्षित करता है।

श्रेयश बताते हैं…

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शुरुआती दिनों में लोग उनके वीडियो को समझ ही नहीं पाते थे। कई बार कॉमेंट्स में सवाल आते “ये खाने की आवाज़ क्यों रिकॉर्ड कर रहे हो?” इसके अलावा उन्हें साउंड क्वालिटी की दिक्कत भी आई। एक छोटे से शोर या गड़बड़ी से पूरा वीडियो खराब हो जाता था। मुझे माइक्रोफोन पर निवेश करना पड़ा और कई बार एक ही वीडियो को 8–10 बार शूट करना पड़ा ताकि सही आवाज़ मिल सके।

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छोटे दुकानदारों को भी देते हैं प्लेटफॉर्म श्रेयश के पेज पर हजारों फॉलोअर्स जुड़े हैं। वे न सिर्फ खाने को नए अंदाज़ में दिखाते हैं, बल्कि स्थानीय फूड ब्रांड्स और छोटे दुकानदारों को भी प्लेटफॉर्म देते हैं। उनका मानना है कि फूड सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, यह एक अनुभव है। अगर आप उस अनुभव को असली रूप में पेश कर सकते हैं, तो लोग जरूर जुड़ेंगे। उनकी यही सोच नए क्रिएटर्स के लिए बड़ी सीख है—हर किसी का अपना USP (यूनिक सेलिंग पॉइंट) होना चाहिए।

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