राशिद इंजीनियर पर तिहाड़ में हमला, घायल:पुलिस ने बताया- किन्नरों से झड़प हुई; पार्टी ने कहा- हत्या की साजिश

जम्मू कश्मीर के बारामुला से लोकसभा सांसद राशिद इंजीनियर पर दिल्ली की तिहाड़ जेल में हमला हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को उन पर एक ट्रांसजेंडर ने हमला तब किया जब वे अपनी बैरक में थे। जेल अधिकारियों ने बताया कि राशिद को मामूली चोटें आईं। वे सुरक्षित हैं।

उधर, राशिद की पार्टी अवामी इत्तेहाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हमले की निंदा की। कहा, "ये राशिद को जेल के अंदर मारने की साजिश है। एक पैटर्न के तहत जेल के अंदर कश्मीरी कैदियों पर हमला हो रह

 है। इससे पहले भी कई कश्मीरियों पर जेल के अंदर हमला हुआ।" जेल अधिकारियों ने इन दावों का खंडन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दावा है कि राशिद पर हमले से पहले उनके और ट्रांसजेंडर कैदी के बीच लंबी बहस हुई थी। अलगाववादी नेता राशिद 2019 से UAPA के केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल की बैरक नंबर 3 में बंद हैं। उन्हें संसद के बीते मानसून सत्र में आने की इजाजत मिली थी।

राशिद इंजीनियर के बेटे ने कहा प्रधानमंत्री कश्मीरी कैदियों सुरक्षा सुनिश्चित करें

राशिद के बेटे अबरार राशिद ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मेरे पिता पर जेल में हमला हुआ। यह हमले की घटना मेरे और परिवार के लिए बहुत दुखद है। हम इस हमले की निंदा करते हैं और प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और जेल प्रशासन से आग्रह करते हैं कि कश्मीरी कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।’

‘जेल में कश्मीरी कैदियों को ट्रांसजेंडर और गैंगस्टरों के साथ रखा जाता है, जो उन्हें परेशान करते हैं, धमकाते और वसूली करते हैं। कुछ ट्रांसजेंडर HIV पॉजिटिव भी हैं। इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।’

2005 में भी गिरफ्तार हुए थे इंजीनियर राशिद

राशिद का नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वताली की जांच के दौरान सामने आया था, जिसे NIA ने घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को कथित तौर पर फंडिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। राशिद को 2005 में भी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। तब राशिद पर आतंकियों की मदद करने का आरोप था। इस केस में राशिद 3 महीने 17 दिन तक राजबाग जेल में बंद रहे। इस मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मानवीय आधार पर सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

जूनियर इंजीनियर से सांसद तक का सफर

राशिद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है । कुछ वक्त रूरल डेवलपमेंट में कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी लग गई।

नौकरी करते हुए भी वे लोगों के मसले उठाते थे। तभी किसी ने उन्हें सियासत में आने की सलाह दी। उन्होंने फैसला कर लिया कि राजनीति में आएंगे। 2008 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी।

उसी साल लंगेट विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद अपनी पार्टी बनाई। 2014 में फिर चुनाव लड़ा और जीते। उनकी पार्टी ने 3-4 सीटों पर चुनाव लड़ा था, बाकी सभी कैंडिडेट हार गए।

और सबसे बड़ी पहचान जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन को लोकसभा चुनाव 2024 में बहुत बड़े अंतर से हराया है।

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