अमेरिका की आंखों में चुभ रहे भारत और चीन, इस अधिकारी ने कर दी हद पार, कहा- ज्यादा टैरिफ लगाओ

नई दिल्ली: इस समय अमेरिका को भारत और चीन अच्छे नहीं लग रहे हैं। आए दिन कोई न कोई अमेरिकी अधिकारी भारत को लेकर गलत बयानबाजी कर रहा है। अब इस बयानबाजी में अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) भी कूद गए हैं। उन्होंने भारत और चीन पर रूस के यूक्रेन युद्ध में मदद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की बात कही है। उनका कहना है कि ऐसे देशों पर सेकंडरी टैरिफ लगाए जाने चाहिए।

ट्रंप प्रशासन पर दबाव डालने को कहा

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन और यूरोप को रूस पर और अधिक आर्थिक दबाव डालना चाहिए। ऐसा करने से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के साथ शांति वार्ता करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। बेसेन्ट ने हाल ही में भारत और चीन को रूसी तेल खरीदने पर बुतुकी बयानबाजी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये देश यूक्रेन में रूस के युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। अब उन्होंने मॉस्को के साथ व्यापार करने वाले देशों पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

पुतिन के पीछे क्यों पड़े हैं बेसेन्ट?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बेसेन्ट ने एनबीसी के ‘मीट द प्रेस’ में कहा, ‘अगर अमेरिका और ईयू मिलकर रूस के तेल खरीदने वाले देशों पर और अधिक प्रतिबंध लगाते हैं, तो रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी। इससे राष्ट्रपति पुतिन बातचीत की टेबल पर आने को मजबूर हो जाएंगे।’ बेसेन्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए तैयार है।

भारत ने पश्चिमी देशों पर उठाए सवाल

भारत ने पश्चिमी देशों की पाखंडी नीति पर सवाल उठाया है। भारत का कहना है कि कई यूरोपीय देश भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह के प्रतिबंधों से छूट दी गई है।

क्यों भड़के बेसेन्ट?

बेसेन्ट की यह टिप्पणी डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई उच्च स्तरीय शिखर बैठक के कुछ हफ्तों बाद आई है। इस बैठक में यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने या रोकने के लिए कोई समझौता नहीं हो सका। यह युद्ध 1945 के बाद यूरोप का सबसे घातक संघर्ष है और अब अपने चौथे वर्ष में है।

बेसेन्ट ने आगे कहा, ‘हमें अपने यूरोपीय सहयोगियों का साथ चाहिए। क्योंकि अगर अमेरिका और ईयू मिलकर ऐसा करते हैं, तो यह एक तरह की रेस होगी कि यूक्रेनी सेना और रूसी अर्थव्यवस्था कब तक टिकी रहती है।’

बता दें कि ट्रंप यूक्रेन में संघर्ष को रोकने में अपनी विफलता से निराश हैं। उन्होंने पहले वादा किया था कि वे दूसरी बार जनवरी में पद संभालने के बाद जल्दी ही युद्ध को खत्म कर देंगे। लेकिन वे अभी तक ऐसा नहीं कर पाए हैं।


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