भगवान राम का जन्म, नेपाल के नक्‍शे में लिपुलेख… केपी ओली ने इस्तीफे के बाद भारत के खिलाफ उगला जहर, लगाए कई आरोप

काठमांडू: नेपाल में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद केपी शर्मा ओली ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। बुधवार 10 सितम्बर को जारी एक बयान में ओली ने खुलासा किया कि वह वर्तमान में नेपाल सेना के शिवपुरी बैरक में हैं। ओली ने सत्ता छोड़ने के बाद भी भारत विरोधी बयानबाजी नहीं छोड़ी है और इस बार तो उन्होंने पद से हटाने जाने के लिए भी भारत पर निशाना साधा है। ओली ने कहा कि उन्होंने सत्ता इसलिए खो दी क्योंकि उन्होंने ‘अयोध्या में भगवान राम के जन्म का विरोध किया था।’

इस्तीफे के लिए भारत पर निशाना

नेपाल के अपदस्थ प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर उन्होंने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा का मुद्दा नहीं उठाया होता तो वह सत्ता में बने रहते। ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा रही इन जगहों को नेपाल अपना क्षेत्र बनाता है। केपी शर्मा ओली ने अपने बयान के जरिए उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि वह देश छोड़कर भाग गए हैं। ओली ने कहा कि काठमांडू के उत्तर में स्थित शिवपुरी में हैं।

अपने पत्र में ओली ने कहा खुद को स्वभाव से जिद्दी बताया और कहा कि अगर जिद्दी न होते तो बहुत पहले हार चुके होते। उन्होंने कहा, ‘इसी जिद के साथ मैंने यहां काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों से हमारे नियमों का पालन करने और स्थानीय स्तर पर पंजीकरण कराने की मांग की थी। मैंने जोर देकर कहा था कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा नेपाल के हैं। मैंने यह भी कहा था कि भगवान श्री राम का जन्म नेपाल में हुआ था, भारत में नहीं, जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है।

ओली बोले- समझौता न करने का नतीजा

ओली ने आगे कहा, ‘अगर मैंने इन बातों पर समझौता कर लिया होता, तो मैं कई आसान रास्ते चुन सकता था और कई लाभ प्राप्त कर सकता था। अगर लिंपियाधुरा समेत नेपाल का नक्शा संयुक्त राष्ट्र को न भेजा गया होता, या अगर मैंने दूसरों को अपने लिए फैसला लेने दिया होता, तो मेरा जीवन बहुत अलग होता। लेकिन इसके बजाय मैंने अपना सब कुछ राज्य को दिया।’ ओली ने कहा कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा कभी मायने नहीं रखती थी।

नेपाल में क्या हुआ है?

केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को Gen-Z के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया था। नेपाल के युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। इन प्रदर्शनों को ओली सरकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने के फैसले ने भड़का दिया और सोमवार को राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शनकारी उतर आए। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई।

देर रात तक ओली सरकार ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध का फैसला वापस ले लिया लेकिन यह युवाओं के गुस्से को शांत नहीं कर सका। मंगलवार को Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने राजधानी पर कब्जा कर लिया और संसद, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट समेत प्रमुख इमारतों में आग लगा दी। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सेना ने सुरक्षित निकाला। आखिरकार दबाव बढ़ता देख ओली ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया।

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