‘कोई गफलत हुई…हमारे पास रजिस्ट्री, नामांतरण-खसरा सबकुछ’:नोटिस पर लोग बोले-बैंक से लोन लेकर बनाए घर; अपना पक्ष रखा
शायद कोई गफलत हुई है… या रिकॉर्ड सही नहीं है। हमारे पास जमीन की रजिस्ट्री है। नामांतरण, बंटाकन और खसरा भी है। जब जमीन खरीदी थी तो राजस्व निरीक्षक और पटवारियों से बात की थी। तब तो जमीन सरकारी नहीं थी, अब कैसे हो गई? इसकी गंभीरता से जांच हो। ताकि, हमारी जिंदगीभर की जमापूंजी बर्बाद न हो।
यह कहना था कि अनंतपुरा कोकता स्थित डायमंड सिटी के लोगों का। यहां के धीरज सिंह चौहान ने बताया कि 1525 स्क्वायर फीट में तीन मंजिला मकान बना रहे हैं। जमीन खरीदने पर मैंने सभी पड़ताल की थी। बैंक अफसरों ने भी कहीं कोई दिक्कत होने की बात नहीं कही। अब मकान बना रहा हूं। अब जमीन को लेकर यह दिक्कत सामने आई है।
जुगराज जुनोरिया ने कहा कि मैंने साल 2017 में 700 स्क्वेयर फीट प्लाट खरीदा था। इसके लिए लोन लिया था। बैंक में 18 चेक भी दिए थे। जमीन खरीदने वक्त मैंने साल 1965 की रजिस्ट्री भी देखी थी, जबकि पशुपालन विभाग को 1995 में जमीन अलॉर्ट हुई थी। इसकी जांच करने पर तस्वीर साफ हो जाएगी। यही बात सरिता बड़ेरिया, मनोज पारर्थी ने भी बताई।
दरअसल, इनके समेत कुल 36 लोग गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा को अपना जवाब प्रस्तुत करने गए थे। तहसीलदार वर्मा ने इन्हें नोटिस जारी किए थे। यदि प्रशासन जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो कब्जे को हटाने की कार्रवाई होगी। सबसे पहले कमर्शियल प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलेगा।
सीमांकन निरस्त कराने की मांग की है-शाही सभी लोग अपने सीनियर एडवोकेट मनोज कुमार शाही के साथ तहसीलदार वर्मा के सामने पेश हुए। एडवोकेट शाही ने बताया कि दस्तावेजों को लेकर तहसीलदार ने नोटिस दिया था। आज रहवासियों ने रजिस्ट्री, नामांतरण, खसरे के दस्तावेज दिए हैं। सुनवाई के दौरान तहसीलदार वर्मा ने कहा है कि पूरी सुनवाई के बिना कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। यह न्याय संगत भी नहीं है। हमने भी पशुपालन विभाग की जमीन वाले दस्तावेज मांगे हैं। वो सही हुआ है या नहीं, इस संबंध में कोई नोटिस भी नहीं दिए गए थे। बिना नोटिस दिए सीमांकन अवैधानिक है। हाईकोर्ट में भी गए हैं। मांग है कि पिछला सीमांकन निरस्त किया जाए।
यह है मामला इससे पहले बुधवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को भी मामले की पूरी जानकारी और रिपोर्ट दिखाई गई थी। बता दें कि डायमंड सिटी के 20 मकान भी जद में है। इसके अलावा खेती कार्य के लिए कब्जा करने पर 8, कॉलोनी के पहुंच मार्ग के लिए 4 नोटिस दिए गए थे। इसके अलावा बीपीएस स्कूल, द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट समेत एक हॉस्टल और एक दुकान संचालक को भी नोटिस दिए थे।
पहले ही अपना पक्ष रख चुके लोग, कहा-कोई लेना नहीं अगस्त में सीमांकन के दौरान निशान और जमीन पर खूटियां लगाई गई थीं। इससे स्पष्ट हो गया था कि प्रशासन किन लोगों को नोटिस देगा। इसलिए लोग एसडीएम रवीशकुमार श्रीवास्तव को अपनी पीड़ा सुना चुके हैं। वहीं, कई लोग पहले से ही अपना पक्ष बता चुके थे। इस मामले में लोगों का कहना है कि जमीन सिद्धार्थ सिन्हा से खरीदी थी। जब इस जमीन के बारे में जानकारी जुटाई गई तो यह सही बताई गई थी। इसके बाद हमने एसडीएम ऑफिस से नामांतरण कराया। सभी अनुमति लेने के बाद ही बिल्डिंग बनाई। डायवर्जन, रजिस्ट्री, नक्शे, नामांकन कराया। सरकारी तौर पर जब बटांकन कराया तो आरआई-पटवारी आए। उन्होंने ही बताया था कि उनके हिस्से में कहीं कोई सरकारी जमीन नहीं है।
सीमांकन में इतना कब्जा मिला था सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार, 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया। दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेट्रोल पंप नगर निगम के हैं। वहीं, बायपास का 200 फीट हिस्सा भी पशुपालन विभाग की जमीन पर ही निकला था। ऐसे में इन्हें सरकारी प्रक्रिया में कोई राहत मिल सकती है।
