मूर्तियां उठाते ही चोरों की गई थी आंखों की रोशनी:नवरात्रि में सीधी हो जाती है माता की झुकी गर्दन
भोपाल के पास रायसेन रोड पर गुदावल गांव स्थित मां कंकाली देवी मंदिर मध्यप्रदेश का एक अद्भुत और चमत्कारी शक्तिपीठ है। लगभग 300 साल पुराने इस मंदिर में विराजमान माता की प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मूर्ति का सिर 45 डिग्री झुका हुआ रहता है और शारदीय नवरात्रि की रात्रियों में विशेष हवन के समय कुछ क्षणों के लिए यह अपने आप सीधा हो जाता है। भक्त मानते हैं कि जो इस अनोखे चमत्कार के साक्षी बनते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
20 भुजाओं वाली मां काली की प्रतिमा
मां कंकाली देवी के मंदिर की स्थापना सन 1731 में हरलाल मीणा ने कराई थी। मंदिर ट्रस्ट उपाध्यक्ष गुलाब सिंह पटेल बताते हैं कि हरलाल मीणा को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्नादेश मिलने पर उन्होंने साथियों के साथ यहां खुदाई की, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, काल भैरव सहित कई प्राचीन मूर्तियां मिलीं।
खुदाई में निकली मूर्ति ने नरकंकालों की माला पहन रखी थी, इसलिए माता को “कंकाली” नाम दिया गया। मंदिर में विराजमान 20 भुजाओं वाली मां काली की प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि जब भी कोई उनके हाथ गिनने की कोशिश करता है, संख्या कभी सही नहीं आती।
पूजा–पाठ और दर्शन व्यवस्था मंदिर के आचार्य सनत पाठक बताते हैं कि यहां माता की पूजा तांत्रिक विधि से की जाती है। नवरात्रि के दौरान निशा कालीन विशेष हवन और पूजन होता है, जिसमें माता की गर्दन सीधी हो जाती है। आम दिनों में मंदिर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है (दोपहर 4 से 5 बजे तक बंद)। भक्त अपनी मन्नत पूरी करने के लिए माता को उल्टा स्वस्तिक या चुन्नी बांधते हैं। मुराद पूरी होने पर भक्त लौटकर चुन्नी खोलते और प्रसाद चढ़ाते हैं।
माता के आशीर्वाद से मिली संतान और नौकरी
मां कंकाली देवी मंदिर से जुड़ी आस्था इतनी गहरी है कि यहां आने वाले हर भक्त की अपनी अलग कहानी और अनुभव है। लोग मानते हैं कि माता के दरबार में जो सच्चे मन से अरदास करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
रमेश चंद्र, जो पिछले 63 सालों से यहां दर्शन करने आ रहे हैं, बताते हैं कि उनकी मां ने संतान प्राप्ति की मनोकामना की थी, जो पूरी हुई। रमेश कहते हैं, “मैं बहुत गरीब परिवार से था। माता जी की कृपा से मुझे शिक्षक की नौकरी मिली और मेरा छोटा भाई भी शिक्षक बना। आज जो भी सुख-सुविधा है, वह माता जी के आशीर्वाद से ही संभव हुआ।
नवरात्र में स्वच्छता अभियान में शामिल हुए सीआरपीएफ कमांडेंट
इसी तरह, सीआरपीएफ कमांडेंट जगदीश प्रसाद बलई नवरात्रि के अवसर पर स्वच्छता अभियान में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे। वे बताते हैं, “हम यहां कई बार आ चुके हैं, भक्तों की मन्नतें पूरी होने की कई घटनाएं सुनने को मिलती हैं। यही कारण है कि यहां देशभर से लोग बार-बार खिंचे चले आते हैं।
