कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है यह… इस अर्थशास्त्री ने दी चेतावनी, कहा- भारत पर सबसे अधिक असर

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाया गया टैरिफ कोरोना महामारी से भी ज्यादा खतरनाक है। यह बात एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) के मुख्य अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ( Erik Berglof ) ने कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ ने कोविड महामारी या वैश्विक वित्तीय संकट से भी ज्यादा अनिश्चितता पैदा की है। उनका यह भी मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं हमेशा बनी रहेंगी। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में दी

भारत पर टैरिफ का ज्यादा असर

एरिक बर्गलोफ ने बताया कि टैरिफ से दुनिया भर में बहुत अनिश्चितता पैदा होती है। हर देश में इसका असर दिखता है। दुर्भाग्य से, भारत उन देशों में से एक है जिस पर इसका सबसे ज्यादा असर हुआ है। यह नीतिगत अनिश्चितता पहले कभी नहीं देखी गई। यह कोविड महामारी और वैश्विक वित्तीय संकट के समय से भी ज्यादा बड़ी है।

उन्होंने कहा कि इससे निवेश और व्यापार पर बहुत ज्यादा लागत आएगी। आर्थिक विकास पर भी इसका बहुत बड़ा असर पड़ेगा। कुछ अनिश्चितता अब कम हो रही है, जो अच्छी बात है। लेकिन अभी भी हमें बहुत आगे जाना है। यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि अमेरिका और चीन के संबंध कैसे रहेंगे। बर्गलोफ ने कहा कि एक बात साफ है कि दुनिया भर में टैरिफ का स्तर बहुत ज्यादा हो जाएगा।

चीन की तैयारी थी पूरी

एरिक बर्गलोफ ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए चीनी सरकार बहुत अच्छी तरह से तैयार थी। वे इसकी उम्मीद कर रहे थे। बर्गलोफ ने बताया कि चीन के पास कुछ क्षेत्रों में बहुत ज्यादा ताकत है। इस ताकत ने बातचीत को संतुलित करने में मदद की है।

उन्होंने चिंता जताई कि कुछ लोग चीन को मूल्य श्रृंखलाओं से बाहर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। इस बात पर उन्होंने विरोध किया है। बर्गलोफ ने बताया कि भारत के साथ कुछ ऐसे उदाहरण हैं जहां चीन ने बहुत सख्त बातचीत की है। चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अमेरिका और अलग-अलग देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत से चीन पर कोई असर न पड़े। उन्होंने कहा कि ‘चीन प्लस वन’ का पैटर्न अभी भी सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इसका मतलब है कि कंपनियां चीन के साथ-साथ किसी और देश में भी उत्पादन कर रही हैं

भारत को कितना फायदा?

एरिक बर्गलोफ ने कहा कि भारत को कुछ बहुत महत्वपूर्ण हिस्सों में फायदा हुआ है। उदाहरण के लिए एप्पल और फॉक्सकॉन ने जो काम किया है। कई कंपनियां भारत आई हैं। यह सिर्फ अमेरिका के साथ जो हुआ, उसकी वजह से नहीं है। बल्कि कंपनियां और देश अपनी मूल्य श्रृंखलाओं में विविधता लाना चाहते हैं। बर्गलोफ ने कहा कि यह इतना आसान नहीं है। क्योंकि ये मूल्य श्रृंखलाएं बहुत ज्यादा दक्षता के दबाव से चलती हैं। उन्होंने लंबे समय से इन मूल्य श्रृंखलाओं के भीतर बहुत करीबी संबंध बनाए हैं।

भारत तेजी से बढ़ता बाजार

एरिक बर्गलोफ ने कहा कि भारत एक बहुत बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। इसलिए, भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियां भारत में बहुत रुचि दिखाती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और ज्यादा एकीकृत होगा, खासकर एशिया के भीतर। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है। लेकिन भारत को इससे बहुत सारे फायदे मिल सकते हैं।

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