सोना, चांदी, बिटकॉइन… सभी के आगे अमेरिकी डॉलर की टांय-टांय फिस, क्या दबदबा हो रहा कम

नई दिल्ली: क्या दुनिया से अमेरिकी डॉलर का दबदबा कम हो रहा है? पिछले कुछ समय से इसमें आ रही गिरावट को देखें तो स्थिति कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर बिटकॉइन, सोना और चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि निवेशक अमेरिकी डॉलर से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित मानी जाने वाली चीजों में लगा रहे हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक साल 2025 की शुरुआत से ही अमेरिकी डॉलर का मूल्य करीब 10% गिर चुका है। इस वजह से निवेशक डॉलर से दूर जा रहे हैं और सोना, चांदी और बिटकॉइन जैसी हार्ड एसेट्स (यानी जिन्हें छुआ या देखा जा सके) खरीद रहे हैं। मशहूर निवेशक केन ग्रिफिन ने ब्लूमबर्ग को इसे ‘डीबेसमेंट ट्रेड’ (यानी मुद्रा के अवमूल्यन से बचने का व्यापार) बताया। ग्रिफिन ने आगे कहा, ‘हम डॉलर से हटकर दूसरी संपत्तियों में भारी उछाल देख रहे हैं। लोग अपने पोर्टफोलियो को अमेरिकी डॉलर से हटाकर सुरक्षित बनाना चाहते हैं, खासकर अमेरिकी सरकार के जोखिम से बचने के लिए।’

हार्ड एसेट्स में क्यों आ रही तेजी?

बिटकॉइन की कीमत 1,26,000 डॉलर से भी ऊपर चली गई है। सोने और चांदी के दाम भी बढ़े हैं। यह तेजी इसलिए भी आ रही है क्योंकि बाजार उम्मीद कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरें घटा सकता है। साथ ही अमेरिकी सरकार का शटडाउन (कामकाज का रुकना) भी जारी है। ग्रिफिन के मुताबिक, अमेरिका की वित्तीय और मौद्रिक नीतियां अब ऐसी लग रही हैं जैसे किसी मंदी के दौरान होती हैं। यही वजह है कि सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ रही है।

गिर रही डॉलर की कीमत

दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा के तौर पर अमेरिकी डॉलर का दबदबा कम हो रहा है। साल 2025 की दूसरी तिमाही में इसका हिस्सा घटकर 56.3% रह गया है, जो साल 1994 के बाद सबसे कम है। साल 2000 से अब तक वैश्विक भंडार में डॉलर का हिस्सा 16 अंक गिर चुका है, जबकि साल 1977 में यह 85% था।विश्लेषकों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो अगले 5 सालों में डॉलर का हिस्सा 50% से भी नीचे जा सकता है। द कोबीसी लेटर ने बताया है कि सुरक्षित ठिकाने, जोखिम भरी संपत्तियां, रियल एस्टेट, क्रिप्टो, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और बाकी सब कुछ रोजाना नए रिकॉर्ड बना रहा है।

साल-दर-साल स्थिति खराब

यहां मुख्य बात यह है कि ज्यादातर संपत्तियों के लिए जो आधार (denominator) है, यानी अमेरिकी डॉलर, वह बदल गया है। अमेरिकी डॉलर अपने 40 से ज्यादा सालों के सबसे खराब साल की ओर बढ़ रहा है, जो साल 2025 में अब तक 10% गिर चुका है। बिटकॉइन ईटीएफ में भारी निवेश आ रहा है।

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