भोपाल के तालाबों में गणेश विसर्जन के बाद पानी सामान्य:रिपोर्ट पर एक्सपर्ट ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार गणेश विसर्जन के बाद भोपाल के तालाबों का पानी सामान्य स्थिति में लौट आया है। हथाईखेड़ा, खटलापुरा, प्रेमपुरा (बड़ा तालाब), शाहपुरा और रानी कमलापति घाट से लिए गए सैंपलों में पानी की गुणवत्ता को लेकर तीन चरणों में प्री (28 अगस्त), ड्यूरिंग (6 से 8 सितंबर) और पोस्ट (11 से 12 सितंबर) में जांच की गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विसर्जन के बाद पानी में घुली ऑक्सीजन (D.O.) बढ़ी है और हेवी मेटल्स जैसे जिंक व कॉपर की मात्रा घटी है। एमपीपीसीबी का दावा है कि तालाबों की जल गुणवत्ता “संतोषजनक” है।

एक्सपर्ट बोले, यह रिपोर्ट मैनपुलेटिव है, प्रैक्टिकली असंभव’

पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने एमपीपीसीबी की इस रिपोर्ट को वैज्ञानिक दृष्टि से “असंभव और भ्रामक” बताया। प्रेमपुरा घाट (बड़ा तालाब) पर मूर्तियां सीधे पानी में डाली जाती हैं। वे दो-तीन दिन वहीं रहती हैं और फिर उनका पूरा मटेरियल पानी में घुल जाता है। ऐसे में यह दावा कि विसर्जन के बाद पानी की ऑक्सीजन बढ़ गई यह संभव ही नहीं है।

उन्होंने कहा- मूर्तियां सॉलिड वेस्ट होती हैं। जब वे गलती हैं तो पानी से ऑक्सीजन खींचती हैं, बढ़ाती नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विसर्जन के बाद हैवी मेटल्स घट गए यह तो और भी बड़ा विरोधाभास है। यह रिपोर्ट टेबल पर बैठकर बनाई गई लगती है।

उन्होंने कहा कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार 11 हैवी मेटल्स और सेडिमेंट्स (तलछट) दोनों की जांच अनिवार्य है, जबकि एमपीपीसीबी ने सिर्फ 6 मेटल्स (Zinc, Copper, Lead, Cadmium, Chromium, Cobalt) की जांच की है। मूर्तियों में उपयोग होने वाले रंगों और केमिकल्स में करीब 30 से ज़्यादा टौक्सिक मेटल्स होते हैं, जिनमें से कई कैंसर कारक हैं। केवल छह मेटल्स लेकर रिपोर्ट पूरी बताना भ्रामक है।

एमपीपीसीबी ने कहा इस पर एमपीपीसीबी के रीजनल मैनेजर बृजेश शर्मा ने कहा कि हैवी मेटल्स का स्तर घटने के पीछे प्राकृतिक कारण हैं। दरअसल उस दौरान बारिश बहुत तेज हुई थी। इससे पानी में डायल्यूशन हुआ और मेटल्स का कंसंट्रेशन कम हो गया। जब पानी का वॉल्यूम बढ़ता है, तो उसकी गुणवत्ता अपने-आप बेहतर दिखती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि “CPCB की गाइडलाइन में 11 मेटल्स का टेस्ट जरूरी बताया गया है, लेकिन आमतौर पर जो प्रमुख रूप से मूर्तियों के रंगों में पाए जाते हैं वही 6 मेटल्स लिए जाते हैं। बाकी मेटल्स (जैसे मर्करी, एंटीमनी, बेरियम आदि) सामान्यतः इन सैंपलों में नहीं मिलते।

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