गुलशन कुमार मर्डर केस, यासीन भटकल… कौन हैं साबिर अली जो कभी आरोपी बने तो कभी बरी, अब JDU के उम्मीदवार

पटनाबिहार में पूर्णिया की अमौर सीट अचानक से हाई प्रोफाइल सीट बन गई है। इस सीट से जदयू ने अपने पुराने चेहरे साबिर अली को टिकट दिया है। साबिर अली इससे पहले भाजपा में चले गए थे। लेकिन 2014 में BJP ने भी उन्हें किनारे लगा दिया था, बावजूद इसके कि उस वक्त उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के चलते सीएम नीतीश कुमार ने जदयू से निकाल दिया था। लेकिन अब बदले समीकरणों के बाद उन्हें जदयू ने अमौर सीट से टिकट दे दिया है।

कौन हैं साबिर अली

बिहार के पूर्वी चंपारण में जन्मे साबिर अली एक समय में राज्यसभा सांसद हुआ करते थे। उन्हें जदयू ने राज्यसभा भेजा था। 2014 तक वो राज्यसभा सदस्य रहे। लेकिन 2014 में ही पीएम मोदी की तारीफ करने के चलते जदयू ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद वो बीजेपी में चले गए, लेकिन उन पर लगे पुराने दाग साबिर अली पर भारी पड़े और फिर उन्हें बीजेपी ने भी कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी। अब एक बार फिर से साबिर अली जदयू के हो चुके हैं।

कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या के आरोपी, फिर बरी

मुंबई में 12 अगस्त 1997 के बीच एक बड़ा कांड हुआ था। इस कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी। इसी दिन कैसेट किंग के नाम से जाने जाने वाले और टी सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की हत्या की गई थी। उन्हें मंदिर में पूजा करते वक्त गोलियों से छलनी कर दिया गया था। इस वारदात को मुंबई के जीतनगर में अंजाम दिया गया था। हत्यारों ने गुलशन कुमार के शरीर में 16 गोलियां उतार दी थीं। इस केस में अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम, संगीतकार नदीम और बाकी आरोपियों के साथ साबिर अली का भी नाम सामने आया था। साबिर अली उस वक्त धारावी में एक पीसीओ (पब्लिक फोन कॉल बूथ) चलाते थे।

11 साल तक गर्दिश में रहे साबिर अली के सितारे

साबिर अली भी इस केस में आरोपी थे। इस आरोप में उन्हें तीन साल जेल में गुजारने पड़े। हालांकि उनके खिलाफ ठोस सबूत न होने के चलते अप्रैल 2002 में बरी कर दिया गया। उनके साथ 15 अन्य आरोपियों को भी गुलशन कुमार मर्डर केस में बरी कर दिया गया था। इसके बाद साबिर अली ने राजनीति में कदम रखा और जदयू के टिकट पर राज्यसभा तक पहुंचे। लेकिन करीब 11 साल तक उनके सितारे गर्दिश में रहे। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन पर कुछ नेताओं ने इंडियन मुजाहिदीन के मास्टरमाइंड यसीन भटकल के साथ संबंध रखने का भी आरोप लगाया, लेकिन इसकी पुष्टि कोई नहीं कर पाया।

साबिर अली की ‘वाइल्ड कार्ड’ एंट्री

इन 11 साल के दौरान साबिर अली को बीजेपी ने 2015 में दोबारा अपने साथ ले लिया, इसके 6 साल बाद साबिर अली को भारतीय जनता पार्टी ने अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया। इसके बाद जदयू ने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में अमौर सीट से सबा जफर को टिकट दिया था। लेकिन शनिवार को अचानक से जदयू ने अपना फैसला बदल लिया और पार्टी में साबिर अली को वाइल्ड कार्ड एंट्री देकर उन्हें अमौर का टिकट दे दिया।

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