अकोला दंगा- CJI के पास जाएगा मामला:हिंदू-मुस्लिम अफसरों की SIT बनाने पर सुप्रीम कोर्ट के जज बंटे

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अकोला दंगा मामले में महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर “स्प्लिट वर्डिक्ट” (मतभेद वाला फैसला) सुनाया।

सरकार ने याचिका में विशेष जांच दल (SIT) में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के पुलिस अधिकारियों को शामिल करने के निर्देश की समीक्षा मांगी थी।

सरकार ने याचिका में कहा था कि पुलिस को धार्मिक आधार पर बांटना राज्य की धर्मनिरपेक्ष नीतियों के खिलाफ है। पुलिसवाले का कोई धर्म नहीं होता।

मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की डबल बेंच ने की। याचिका पर दोनों जजों ने अलग-अलग राय रखी।

अब यह मामला चीफ जस्टिस बीआर गवई के पास भेजा जाएगा, जो यह तय करेंगे कि इसे बड़ी पीठ के पास भेजा जाए या किसी तीसरे जज से अंतिम राय ली जाए।

दरअसल महाराष्ट्र के अकोला में मई 2023 में हुए दंगों में 1 व्यक्ति की मौत हुई थी और दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग घायल हुए थे।

11 सितंबर- सुप्रीम कोर्ट बोला- पुलिसकर्मी जाति-धर्म से ऊपर उठकर काम करें

सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर को कहा था कि पुलिस वर्दी पहनने के बाद अफसरों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर सिर्फ कानून के अनुसार काम करना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि दंगों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया जाए, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सीनियर ऑफिसर शामिल हों।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच 17 साल के मोहम्मद शरीफ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। शरीफ ने याचिका में कहा- दंगों के दौरान मुझ पर हमला हुआ, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और न ही जांच की।

मई 2023- अकोला में दो समुदाय के बीच पत्थरबाजी

महाराष्ट्र के अकोला में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर 13 मई 2023 को दो समुदाय के बीच हुई हिंसक हुई थी। अकोला SP संदीप घुघे ने बताया था- ओल्ड सिटी इलाके में मामूली बात पर दो समुदाय के बीच पत्थरबाजी हुई थी।

उपद्रवियों ने कई वाहन जला दिए। कुछ लोगों ने थाने का घेराव करने की भी कोशिश की थी। इस दौरान विलास महादेवराे गायकवाड़ नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग घायल हुए थे।

जुलाई 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

मोहम्मद शरीफ ने इससे पहले जुलाई 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) में याचिका लगाई थी लेकिन, हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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