अभिमान मत करो, भक्तों को सुविधा से महाकाल के दर्शन कराओ : पं. प्रदीप मिश्रा

 उज्जैन ।  बड़नगर रोड पर चल रही श्री शिव महापुराण कथा में पं.प्रदीप मिश्रा ने ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने अधिकारी, कर्मचारी व सुरक्षाकर्मियों को इंगित करते हुए कहा कि महाकाल मंदिर में सेवा का अवसर प्राप्त हुआ है, तो अभिमान मत करो। भक्तों को सुविधा से भगवान महाकाल के दर्शन कराओ। उन्हें धक्के मत मारो, भक्तों को कुछ पल भगवान को दर्शन का अवसर प्रदान करो। क्योंकि कालाधिपति महाकाल सब देख रहे हैं।

दर्शन व्यवस्था पर साधा निशाना

पं. मिश्रा ने भक्तों से कहा कि आपको अगर भगवान का जलाभिषेक करने का अवसर प्राप्त नहीं हो रहा है, भगवान के दूर से दर्शन हो रहे हैं तो परेशान मत होना। क्योंकि शिव महापुराण की वायव्य संहिता कहती है अगर शिव का दर्शन दूर से हो रहा है और आप जलाभिषेक नहीं कर पा रहे हैं तो शिवलिंग के ऊपर बंधी जलाधारी से प्रवाहित जल को भी अगर आप देख लेंगे तो आपकी ओर से भगवान का जलाभिषेक हो जाएगा। इसलिए कल कथा की पूर्णाहुति के बाद जब घर लौटो तो भगवान महाकाल के दर्शन करने अवश्य जाना तथा उनसे अपने घर चलने की प्रार्थना करना। सोमवार को कथा की पूर्णाहुति होगी पं.मिश्रा सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक भक्तों को कथा सुनाएंगे। रविवार को कथा में करीब सात लाख भक्त मौजूद थे।

कथा में लगातार विवाद व मारपीट के मामले सामने आए

पं. प्रदीप मिश्रा की कथा में पांच दिन से लगातार विवाद व मारपीट के मामले सामने आते रहे। दो दिन पहले एक महिला पुलिस आरक्षक व महिला निजी सुरक्षाकर्मी के बीच विवाद के बाद जमकर मारपीट हुई। इसके बाद पंडाल में महिलाओं के बीच बैठने को लेकर विवाद हुआ। भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात एक पुलिसकर्मी खींचकर एक व्यक्ति को कुर्सी उठाकर मारने दौड़ा। इंटरनेट मीडिया पर इन घटनाओं के वीडियो देखे जा रहे हैं। पं.मिश्रा की व्यक्तिगत सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के भी श्रद्धालुओं के साथ बदसलूकी करने की खबरें आईं।

होटल में बुलाना पड़ा पुलिस बल

आयोजकों ने पं. प्रदीप मिश्रा व उनके परिवार के ठहरने के लिए होटल सोलिटायर में व्यवस्था की है। जानकारी मिलने पर शहर के लोग उनके दर्शन के लिए होटल पहुंचने लगे। शनिवार शाम होटल में भीड़ बेकाबू हो गई। परिचितों से परेशान होकर आयोजक भाग निकले। स्थिति बिगड़ते देख होटल संचालक ने संबंधित थाने को सूचना दी। थाने से बल आने के बाद स्थिति को संभाली।

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