दानापुर में BJP के ‘राम’ ने ढहाया था लालू का किला, अब मंत्री पद का इनाम, जानिए कौन हैं रामकृपाल यादव

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में 202 सीट जीत एनडीए ने सत्ता बरकरार रखी है। आज नीतीश कुमार ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। नीतीश कुमार के साथ जीते हुए कई विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण में एक नाम पूर्व सांसद और दानापुर में लाल यूादव का ‘किला’ ढहाने वाले रामकृपाल यादव का भी है। रामकृपाल यादव ने दानापुर सीट से राजद के रीतलाल यादव को 30 हजार से ज्यादा वोट से हराते हुए जीत दर्ज की। अब बीजेपी ने मंत्री बनाकर रामकृपाल यादव को लालू का ‘किला’ ढहाने के लिए इनाम दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं रामकृपाल यादव ….

कौन हैं रामकृपाल यादव?, लालू के करीबी से राजनीतिक विरोधी तक

रामकृपाल यादव का जन्म 12 अक्टूबर 1957 को हुआ था। एक समय पर वे लालू यादव के बेहद करीबी और उनके ‘छोटे भाई’ के रूप में जाने जाते थे। जब लालू यादव को कोर्ट ने सजा सुनाई तो राजद ने राम कृपाल यादव को टिकट नहीं दिया। तब रामकृपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर पाटिलपुत्र सीट से जीत हासिल की। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और केंद्र में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बने।

मीसा भारती को दो बार दी मात

2014 के बाद 2019 में भी उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और दोबारा लालू यादव की बेटी मीसा भारती को हराया। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे पाटलिपुत्र से मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार मिली।

कितने पढ़े-लिखे हैं रामकृपाल यादव?

रामकृपाल यादव ने मगध यूनिवर्सिटी, पटना से बीए और कानून की पढ़ाई की है। राजनीति में उनकी शुरुआत 1991 में हुई, जब वे लालू यादव की आरजेडी के टिकट पर पटना लोकसभा सीट से सांसद बने। इसके बाद वे 1996 और 2004 के चुनावों में भी जीतकर संसद पहुंचे। 2009 में उन्होंने लालू यादव के लिए अपनी सीट छोड़ दी, जब परिसीमन के बाद यह पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र बन गया था। लेकिन यहां लालू यादव रेलमंत्री रहते हुए भी चुनाव हार गए।

2025 में रामकृपाल का फिर ‘धमाका’, दानापुर में दर्ज की बड़ी जीत

2024 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी बीजेपी ने उनका भरोसा नहीं खोया। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें दानापुर से टिकट दिया गया, जहां उन्होंने रीतलाल यादव को बड़े अंतर से हराते हुए वापसी की। इस शानदार जीत के बाद ही उन्हें मंत्री पद देकर सम्मानित किया गया।

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