अर्जुन रामपाल मिलिट्री बैकग्राउंड से, नाना थे ब्रिगेडियर, नैशनल अवॉर्ड विनर के लिए घर खर्च चलाना भी था मुश्किल

बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं, जिन्हें देखकर कोई भी पहली नजर में यही कहेगा कि उनकी जिंदगी शुरू से ही चमक और शोहरत से भरी रही होगी। अर्जुन रामपाल भी ऐसे ही चेहरों में से एक गिने जाते हैं। उनकी मॉडल जैसी पर्सनैलिटी देखकर हर किसी को यही लग सकता है कि उनकी फिल्मी जर्नी आसान रही होगी। लेकिन, असलियत इससे बिल्कुल अलग है और संभव है कि कइयों को इस बारे में पता भी न हो।

शुरुआत में अर्जुन को ऐसे दौर से गुजरना पड़ा, जब उनके लिए घर का रोजमर्रा का खर्च चलाना भी काफी मुश्किल हो जाता था। यह स्ट्रगल उनकी जिंदगी का ऐसा पहलू है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।

भारतीय सेना के लिए पहली आर्टिलरी गन डिजाइन करने वाली टीम में थे नाना

अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उनका परिवार मिलिट्री बैकग्राउंड से जुड़ा था। उनके नाना ब्रिगेडियर गुरदयाल सिंह भारतीय सेना के लिए पहली आर्टिलरी गन डिजाइन करने वाली टीम का हिस्सा रहे थे। अर्जुन जब काफी छोटे थे, तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मां ने अकेले किया, जो एक स्कूल टीचर थीं।

स्कूली पढ़ाई-लिखाई महाराष्ट्र में और फिर दिल्ली के हिंदू कॉलेज पहुंचे

उनकी स्कूली पढ़ाई-लिखाई महाराष्ट्र में हुई और आगे की पढ़ाई के लिए वह दिल्ली आ गए। यहां पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से इकॉनॉमिक्स में ग्रैजुएशन किया। एक दिन पार्टी में अर्जुन की मुलाकात फैशन डिजाइनर रोहित बल से हुई और उन्होंने उनकी पर्सनैलिटी से इम्प्रेस होकर उन्हें फौरन मॉडलिंग करने का ऑफर दे दिया। देखते ही देखते वह भारत के टॉप मॉडलों में गिने जाने लगे। साल 1994 में उन्हें मॉडलिंग के लिए ‘सोसाइटी फेस ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड भी उन्हें मिला। कहते हैं कि हर चमक के पीछे एक गहरी कहानी होती है। वैसे मॉडलिंग में नाम बनाने के बावजूद अर्जुन के लिए घर चला पाना मुश्किल हो गया था।

उनके पास खाना खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे

अर्जुन ने एक इंटरव्यू में अपना ये किस्सा खुद बताया था। उन्होंने बताया था कि फिल्मों में आने की कोशिशों के दौरान उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि कई बार उनके पास खाना खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। दिखने में मॉडल जैसे पर जिंदगी में वह ये स्ट्रगल कर रहे थे कि घर कैसे चलेगा, आने वाले दिनों में काम मिलेगा भी या नहीं।

अर्जुन की एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई

ऐसे ही स्ट्रगल के दौर में अर्जुन को अपनी पहली फिल्म ‘मोक्ष’ मिली, लेकिन यह फिल्म बनने में पांच साल लग गए। इस बीच उन्होंने मॉडलिंग छोड़ दी थी और कोई फिक्स काम भी नहीं था। आखिरकार 2001 में उनकी पहली रिलीज फिल्म ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ आई। यह फिल्म भले बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन अर्जुन की एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई।

लुक और एक्टिंग ने इंडस्ट्री में पकड़ को बनाए रखा

अर्जुन ने ‘दीवानापन,’ ‘दिल का रिश्ता,’ और ‘वादा’ जैसी फिल्मों में रोमांटिक भूमिकाएं निभाईं, जिन्हें दर्शकों ने पसंद तो किया, लेकिन ये फिल्में खास हिट नहीं हो सकीं। फिर भी अर्जुन के लुक और एक्टिंग ने इंडस्ट्री में पकड़ को बनाए रखा।

2008 में आई ‘रॉक ऑन’ में उन्होंने एक रॉकस्टार की भूमिका निभाई

अर्जुन के करियर में बड़ा मोड़ 2006 और 2007 के बीच आया। शाहरुख खान की फिल्म ‘डॉन’ में उनका किरदार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। लेकिन, असली पहचान उन्हें ‘ओम शांति ओम’ में निभाए गए विलन के रोल से मिली। उन्हें खतरनाक विलन के रूप में देखकर दर्शक हैरान रह गए। इसके बाद 2008 में आई ‘रॉक ऑन’ में उन्होंने एक रॉकस्टार की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्होंने असली गिटार सीखने में महीनों लगाए।

साल 2010 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए मिला नैशनल अवॉर्ड

इस फिल्म ने न सिर्फ उनके करियर में नई जान डाली, बल्कि उन्हें साल 2010 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

‘आई सी यू’ और ‘डैडी’ जैसी फिल्मों को प्रड्यूस किया

अर्जुन ने बाद में अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘चेजिंग गणेशा फिल्म्स’ शुरू की और ‘आई सी यू’ और ‘डैडी’ जैसी फिल्मों को प्रड्यूस किया। उनके इस लंबे करियर में कई फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया तो कई असफल भी रहीं, लेकिन अर्जुन ने कभी कोशिशें नहीं छोड़ीं। आज अर्जुन रामपाल हिंदी सिनेमा के स्थापित नामों में गिने जाते हैं। वह फिल्मों में एक्टिव हैं और फिटनेस को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। इन दिनों अर्जुन अपकमिंग फिल्म ‘धुरंधर‘ को लेकर चर्चा में हैं, जो 5 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है।

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