कोरोना के बढ़ते मामलों पर अस्पतालों में रखे गए 5000 कर्मी….

कोरोना के बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए कोविड अस्पतालों में पांच हजार आउटसोर्सिंग कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए यह तैनाती की है। इसमें लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स, कंप्यूटर आपरेटर, नान मेडिकल साइंटिस्ट व माइक्रोबायोलाजिस्ट शामिल हैं। सभी कर्मचारियों को तत्काल अस्पतालों में पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश भर में कोविड अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पर तैनात पांच हजार कर्मचारियों की सेवा अवधिक 31 मार्च को खत्म हो गई थी। इस बीच लगातार बढ़ रहे कोरोना रोगियों को देखते हुए सभी को एक माह के लिए रखने का निर्णय लिया गया है। एनएचएम, उप्र की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय की ओर से एक अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल तक की अवधि के लिए संबंधित कर्मचारियों को सेवा विस्तार किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है।

इन पांच हजार कर्मचारियों में से तीन हजार लैब टेक्नीशियन, 1,360 कंप्यूटर आपरेटर, 600 स्टाफ नर्स, 20 नान मेडिकल साइंटिस्ट और बाकी माइक्रोबायोलाजिस्ट शामिल हैं। लैब टेक्नीशियन व कंप्यूटर आपरेटर को 11-11 हजार रुपये मासिक मानदेय, स्टाफ नर्स को 16 हजार रुपये मानसिक मानदेय, नान मेडिकल साइंटिस्ट को 4,200 रुपये मासिक मानदेय और माइक्रोबायोलाजिस्ट को 55 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। मालूम हो कि कोविड अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों की पहली लहर के दौरान अप्रैल 2020 में की गई थी।

तब से लगातार तीन-तीन महीने इन्हें सेवा विस्तार दिया जा रहा था। बीते 31 मार्च को इनकी सेवा अवधि पूरी होने के बाद यह मामला लटक गया था। मगर कोरोना के लगातार बढ़ रहे रोगियों को देखते हुए इन्हें एक महीने का सेवा विस्तार देकर राहत दी गई है। विदित हो कि पहले करीब 20 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग पर रखा गया था लेकिन धीरे-धीरे जरूरत के अनुसार स्टाफ को लगातार घटाया गया। अब पांच हजार आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं।

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