संजय दत्त बाथरूम में अपनी हालत देख डर गए, याद किए रिहैब सेंटर के 2 साल, पिता सुनील दत्त के सामने गिड़गिड़ाए

उन्होंने कहा, ‘टर्निंग पॉइंट मैं ही था। एक सुबह मैं उठा, बाथरूम गया और मैंने खुद को देखा और मैं डर गया। मुझे लग रहा था कि मैं मर रहा हूं। मेरा चेहरा कुछ और ही लग रहा था। इसलिए मैं उस समय मदद के लिए अपने पिता सुनील दत्त के पास गया और उन्होंने मेरी मदद की और मेरा साथ दिया। मैं उन भाग्यशाली लोगों में से एक था जिन्हें उन दिनों अमेरिका के एक रिहैब सेंटर में भेजा गया था। मैंने उस रिहैब सेंटर में दो साल बिताए।’

रिहैब सेंटर में संजय दत्त की जिंदगी के पल

रिहैब सेंटर में बिताए अपने समय को याद करते हुए संजय दत्त ने बताया, ‘उन दो सालों में, मैं काउंसलरों के साथ बाहर गया, झील के किनारे गया, बारबेक्यू किया। मैं ज्यादा बातचीत करने लगा, ज्यादा बातूनी हो गया। मैं सिनेमा के बारे में, इधर-उधर, हर चीज के बारे में बात करता। और मैंने सोचा, ‘आखिर मैं इतने साल क्यों बर्बाद कर रहा था? इस खूबसूरत झील को निहारने, बारबेक्यू करने, हाईवे पर मैराथन दौड़ने, साइकिल चलाने के बजाय, ये कुछ और ही था, ऐसा कुछ जो मैंने इतने सालों में कभी अनुभव नहीं किया था। और मैंने कहा, ‘कोई बात नहीं, यही वो जिंदगी है जो मैं चाहता हूं। ये वो नहीं जो मैं जी रहा था।’ यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था।’

रिहैब सेंटर लौटने की इच्छा हुई!

उन्होंने युवाओं से ऐसे ही जाल में फंसने से बचने को कहा और बताया कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इलाज पूरा होने के बाद उन्हें कभी रिहैब सेंटर में लौटने की इच्छा हुई, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘कभी नहीं। अब लगभग 40 साल से ज्यादा हो गए हैं। कभी नहीं। क्योंकि जब मैं उस जिंदगी को याद करता हूं तो मुझे एहसास होता है कि ‘मैं वो नहीं हूं’, और मुझे नहीं पता कि मैंने ऐसा कैसे किया।’

मुंबई बम धमाकों पर बोले संजय

इसी बातचीत में, संजय ने एक और उथल-पुथल भरे चैप्टर 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद आर्म्स एक्ट के तहत अपनी जेल की सजा के बारे में भी बात की। उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘मेरे पिता को धमकाया जा रहा था, मेरी बहनों को धमकाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि मेरे पास बंदूक है, लेकिन वे इसे साबित नहीं कर सके। इसलिए मुझे नहीं पता कि आखिर ऐसा क्या था जिसने मुझे वहां कैद कर दिया। मैं बस इतना कह सकता हूं कि उन्हें यह समझने में 25 साल नहीं लगने चाहिए थे कि मैं टाडा एक्ट या बम विस्फोट मामले में शामिल नहीं था। मुझे नहीं पता कि उन्हें यह समझने में 25 साल क्यों लगे और फिर बिना बंदूक के, बिना बंदूक पाए मुझे आर्म्स एक्ट मामले में दोषी क्यों ठहराया गया।’

‘धुरंधर’ रिलीज

संजय दत्त अगली बार बड़े पर्दे पर फिल्म ‘धुरंधर’ में नजर आएंगे, जो इस शुक्रवार को रिलीज होने वाली है।

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