सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल का निधन:​​​​​​​देश के सबसे युवा राज्यपाल बने थे, राज्यसभा सांसद भी रहे; आज दिल्ली में अंतिम संस्कार

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। दिल्ली भाजपा ने X पोस्ट में उनके निधन की जानकारी दी है।

दिल्ली भाजपा ने बताया कि स्वराज कौशल का 73 साल की उम्र में 4 दिसंबर को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जाएगा।

स्वराज कौशल देश के इतिहास में सबसे कम उम्र में राज्यपाल बनने वाले शख्स थे। 1990 में उन्हें मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया था। उस वक्त उनकी उम्र महज 37 साल थी।

इसके अलावा कौशल 1998 से 2004 तक हरियाणा से राज्यसभा सांसद भी रहे। सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट रहे। इस दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े।

बेटी बांसुरी बोलीं- पिता का जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा

स्वराज कौशल की बेटी और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने X पर लिखा- पापा स्वराज कौशल जी, आपका स्नेह, आपका अनुशासन, आपकी सरलता, आपका राष्ट्रप्रेम और आपका अपार धैर्य मेरे जीवन की वह रोशनी हैं जो कभी मंद नहीं होगी।

उन्होंने आगे लिखा- आपका जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा बनकर उतरा है, पर मन यही विश्वास थामे हुए है कि आप अब मां के साथ फिर मिल चुके हैं, ईश्वर के सान्निध्य में, शाश्वत शांति में। आपकी बेटी होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा गौरव है। आपकी विरासत, आपके मूल्य और आपका आशीर्वाद ही मेरी आगे की हर यात्रा का आधार रहेंगे।

दरअसल, देश के बंटवारे के वक्त लाहौर के धरमपुरा इलाके के रहने वाले हरदेव शर्मा और लक्ष्मी देवी हरियाणा के अंबाला के कैंट एरिया में रहने लगे थे। हरदेव RSS से जुड़े थे।

14 फरवरी 1952 को उनके घर सुषमा का जन्म हुआ। सुषमा शर्मा बचपन से मेधावी थीं। अंबाला में सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन के बाद सुषमा ने चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ किया और राजनीति में आईं।

इसी दौरान सुषमा शर्मा की मुलाकात स्वराज कौशल से हुई। ‘RSS के राष्ट्रवादी विचार’ वाली सुषमा और समाजवादी सोच के स्वराज कौशल के बीच दोस्ती हो गई। सुप्रीम कोर्ट में साथ में प्रैक्टिस करने के दौरान दोनों के बीच प्रेम का इजहार हुआ।

ये इमरजेंसी का दौर था, सोशलिस्ट और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नाडिंस पर आरोप लगा था कि उन्होंने बड़ौदा में अवैध रूप से डायनामाइट रखा था। जॉर्ज आपातकाल के विरोध में थे, डायनामाइट केस के बहाने उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। स्वराज और सुषमा जॉर्ज का केस लड़ने के लिए एक साथ कोर्ट जाया करते थे।

शुरुआत में दोनों के घर वाले शादी के लिए तैयार नहीं थे। आखिरकार इमरजेंसी के बीच 13 जुलाई, 1975 को शादी हो गई।

इमरजेंसी के बाद के आम चुनावों में जॉर्ज फर्नांडिस ने जेल से ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया। सुषमा स्वराज ने बड़ौदा जाकर जॉर्ज फर्नांडिस की तरफ से पर्चा भरा और एक नारा दिया- "जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा।" ये नारा बहुत मशहूर हुआ और जॉर्ज चुनाव जीत गए।

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