पुतिन के दौरे पर भारत ने ठुकरा दिया था यूक्रेन किलर रूसी गेरान ड्रोन का ऑफर! पश्चिमी हथियारों का बनाया था कब्र‍िस्‍तान, रूस को झटका

मॉस्को/नई दिल्ली: रूस ने गेरान UAV का इस्तेमाल करते हुए यूक्रेन को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस यूएवी को रोकने में यूक्रेन के पश्चिमी देशों के हथियार काफी हद तक नाकाम रहे हैं। यानि, रूस- यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी की लोइटरिंग म्यूनिशन कितनी खतरनाक भूमिका निभा सकते हैं। ये यूएवी भारी विस्फोटकों के साथ सटीक हमला करते हैं और हथियार भंडार के साथ साथ तेल भंडार समेत दुश्मन के क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर सकते हैं। रूस ने ईरान से HESA Shahed-136 यूएवी खरीदने के बाद उसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में करना शुरू किया।

रूस ने ईरानी HESA Shahed-136 यूएवी में कई तरह के अपग्रेडेशन किए, जैसे उसमें डेल्टा-विंग डिजाइन, GPS-असिस्टेड इनर्शियल नेविगेशन और सैल्वो-लॉन्चिंग क्षमता शामिल किया गया, जिसने इसे ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाई-वैल्यू टार्गेट्स के खिलाफ एक भयानक हथियार बना दिया। ईरान ने दिसंबर 2021 में इस यूएवी के ऑपरेशनल होने की जानकारी दी थी और इसके बाद रूसी इंजीनियरों ने इसे रिवर्स इंजीनियरिंग कर इसका स्वदेशी वैरिएंट Geran तै

रूस ने गेरान UAV बेचने के लिए खूब मारे हाथ-पांव
आधुनिक युद्ध में UAV कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हाल ही में अमेरिकी सेना ने भी LUCAS नाम से रूसी गेरान की तरह ही UAV बनाया है, जिसे 3 दिसंबर 2025 को पेश किया है। रूस ने पिछले कुछ महीनों से भारत को गेरान UAV बेचने के लिए कई स्तर पर अभियान चलाया है। अल्फा डिफेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे, उस दौरान भी रूसी अधिकारियों ने भारतीय सेना को एक कस्टमाइज़्ड UAV वेरिएंट दिया। पिछले कुछ महीनों में देखा गया है कि रूस की सरकार से जुड़े डिफेंस वेबसाइट्स और डिफेंस एक्सपर्ट्स ने दर्जनों लेख लिखकर इस यूएवी को भारत के लिए जरूरी बताया है।
डिफेंस एक्सपर्ट्स और डिफेंस वेबसाइट्स रूसी नेटवर्क के साथ मिलकर बार बार बताने की कोशिश की है कि भारत को क्यों इस यूएवी को खरीदना चाहिए। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना ने रूस के ऑफर को ठुकरा दिया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारतीय सेना के पास खुद लंबी दूरी के सटीक स्ट्राइक के लिए ड्रोन को लेकर अपनी डॉक्ट्रिन है, जिसे बेहतर बनाने के लिए काम जारी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ देसी और विदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन तैनात किए थे। इस दौरान इन सिस्टम ने बेहतरीन टर्मिनल-स्टेज सटीकता और मजबूत डेटालिंक स्टेबिलिटी दिखाई थी।
भारत ने क्यों ठुकराया रूस का ऑफर?
दरअसल, भारतीय सेना अब मॉड्यूलर वॉरहेड ऑप्शन के साथ लंबी-रेंज लोइटरिंग प्लेटफॉर्म चाहती है। इस सर्विस के लिए हाई एंड्योरेंस, सटीक नेविगेशन सूट और लचीले इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर फ्रेमवर्क की जरूरत है। रूस ने अपने मॉडिफाइड ईरानी- ड्रोन सिस्टम को भारत की इसी जरूरत के मुताबिक बताया। लेकिन अल्फा डिफेंस ने रक्षा मंत्रालय के कई सीनियर अधिकारियों के हवाले से इसकी पुष्टि की है कि भारत, रूस से ऐसे UAV सिस्टम खरीदने में दिलचस्पी नहीं रखता है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने जोर दिया है कि भारत के पास अब एक ऐसी घरेलू इंडस्ट्री डेवलप हो रही है, जो खुद ऐसे UAV तैयार कर सकती है। भारतीय अधिकारियों ने ‘रक्षा संप्रभुता कंट्रोल’ पर ज्यादा जोर दिया है।

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