चिंता मत कर बेटे, सर्दी बढ़ते ही शहीद गुरनाम की प्रतिमा को ओढ़ाया कंबल, मां का प्यार भावुक कर देगा

जम्मू : संतान कहीं भी हो, मां का दिल उसके लिए हमेशा धड़कता है। बेटे के लिए प्यार और आशीर्वाद कभी कम नहीं होते। जम्मू के आर.एस. पुरा में शहीद बीएसएफ जवान गुरनाम सिंह की मां आज भी बेटे का ध्यान रखती हैं। वह अपने शहीद बेटे गुरनाम सिंह की प्रतिमा को लाड-प्यार करती हैं। जब हाल में सर्दियां बढ़ने लगीं तो उन्होंने प्रतिमा को ठंड से बचाने के लिए उस पर कंबल डाल दिया। जब वहां गुजरने वाले चौराहे से गुजरे तो उन्हें मां के अनमोल प्यार के बारे में पता चला।

2016 में शहीद हुए थे कॉन्स्टेबल गुरनाम सिंह

26 साल के गुरनाम सिंह ने 2016 में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उन्होंने हज़रानगर सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे छह आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। 19-20 अक्टूबर की दरम्यानी रात को गुरनाम सिंह ने एक आतंकवादी को मार गिराया और बाकी को वापस भागने पर मजबूर कर दिया। आतंकवादियों ने रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और भारी गोलीबारी चलाए, लेकिन गुरनाम सिंह ने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा की। इस वीरता के लिए सरकार ने शहीद को राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित किया था। सरकार ने शहीद की याद में आर एस पुरा में प्रतिमा लगाई।

मां करती हैं बेटे की प्रतिमा का देखभाल

शहीद गुरनाम सिंह की मां जसवंत कौर अपने बेटे की प्रतिमा की देखभाल रोज़ाना करती हैं। वह प्रतिमा के पास आती हैं, उसे साफ करती हैं । जसवंत कौर यह सुनिश्चित करती हैं कि वह हमेशा साफ-सुथरी रहे और उस पर धूल न पड़े। कुछ समय पहले उन्होंने प्रतिमा को ठंड से बचाने के लिए उस पर एक कंबल डाल दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह दिखावा नहीं है, बल्कि एक मां का प्यार है। जसवंत कौर ने बताया कि जब उनका बेटा छुट्टियों में घर लौटता था, तब पहले कहता था कि मां मेरे लिए गर्म रजाइयां निकाल देना। उसे काफी ठंड लगती थी।

बेटे की शहादत को नहीं भूली मां

शहीद गुरनाम सिंह के पिता कुलबीर सिंह ने कहा कि बेटा जिंदा हो या न हो, मां का अपने बच्चे के लिए प्यार कभी कम नहीं होता। एक मां हमेशा बच्चों के लिए मां ही रहती है। उन्होंने बताया कि जसवंत कौर बेटे शहीद होने के 10 साल बाद भी उससे प्यार करती रही। कभी वह चुपचाप रोती है और कभी वह खाना छोड़ देती है। उन्होंने यह भी बताया कि सर्दियों में वे चार महीने तक प्रतिमा को गर्म कंबल से ढक कर रखते हैं। सर्दी कम होने पर फिर उसे हल्के कंबल से बदल देते हैं। कुलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें पता है कि प्रतिमा को ठंड नहीं लगती है, मगर वह अपना फर्ज पूरा करते हैं। पिछले 10 साल से वह ऐसा कर रहे हैं। परिवार को अपने बेटे पर गर्व है, जिसने वतन के लिए अपनी जान दी।

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